शाहजहांपुर/मिर्जापुर। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों में नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण गंगा, रामगंगा समेत जिले से होकर बहने वाली बहगुल आदि नदियों में बाढ़ की स्थिति बरकरार है। हालांकि, बीते 24 घंटे के दौरान बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी कम होने से भैंसार बांध ढाई घाट पर गंगा का जल स्तर दस सेमी घट गया, लेकिन मिर्जापुर क्षेत्र में तमाम तटवर्ती गांव बाढ़ से अभी भी घिरे हैं। आजादनगर से लेकर सीमावर्ती जनपद फर्रुखाबाद के कमथरी से चितार गांव तक गंगा हिलोरें मार रही है और वहां नाव के बगैर पहुंचना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। उधर, रामगंगा के जल स्तर में गिरावट से परौर क्षेत्र के मोहनपुर और आसपास के गांवों में कटान की आशंका बढ़ गई है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से सोमवार सुबह गंगा में 32121 क्यूसेक पानी का बहाव जारी रहा। हालांकि, पानी की यह मात्रा बीते दिन की तुलना में लगभग 23000 क्यूसेक कम है। इस कारण भैंसार बांध से ढाई घाट तक गंगा दस सेमी घटकर बह रही है। अन्य बैराजों से 10302 क्यूसेक पानी की निकासी के बावजूद चौबारी (बरेली) से लेकर जिले के परौर तक रामगंगा भी दस सेमी घट गई है, लेकिन दोनों नदियों में बाढ़ के तेवर जस के तस बने हैं। इस्लामनगर गांव का दक्षिणी क्षेत्र भी बाढ़ से घिर चुका है।
बाढ़ से घिरे ग्राम आजादनगर के ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हो रहीं हैं। तीन दिन से जलमग्न इन घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं। प्रशासन ने बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकलने के लिए सिर्फ एक नाव देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। उनके खाने-पीने का कोई बंदोबस्त करने की जरूरत नहीं समझी। आजादनगर में नाजिम, मोहम्मद सद्दीक, नन्हें, गिरीश, बशीर, पप्पू, लईक आदि के छप्परदार घरों में बाढ़ का पानी भर जाने से ईंधन की लकड़ी और राशन सामग्री भीगकर खराब हो गई। बाढ़ पीड़ित एक-दूसरे की मदद से परिवारों को जिंदा रखे हुए हैं। जानवरों के चारे की भी विकट समस्या हो गई है। खेतों में हरा चारा बाढ़ में डूब गया है। जबकि घरों में रखा भूसा भीग जाने से पशु भूख से बेहाल हैं। उधर, सीमावर्ती जनपद फर्रुखाबाद के गांव चितार और कमथरी का काफी हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। दो र्सौ मीटर लंबे इस्लामनगर-चमथरी मार्ग पर बाढ़ का पानी आ गया है। जलालाबाद-शमशाबाद मार्ग भी बाढ़ से घिर जाने के कारण आवागमन बाधित होने लगा है।
आजादनगर के बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस मदद नहीं दी है। प्रशासन की ओर से सिर्फ एक नाव मुहैया कराई गई है जबकि गांव में खाने-पीने का संकट होने के कारण खाद्य सामग्री बांटे जाने की जरूरत है।
मुन्ना खां, आजादनगर
बाढ़ से घिरे गांवों में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। आजादनगर गांव के वारिस का दो वर्षीय पुत्र मेमन और तहसीमा खातून की एक वर्षीय बेटी तोलिका सहित कई बच्चेे और बुजुर्ग बुखार से परेशान हैं।
आरिफ खां, इस्लामनगर
अभी गावों के अंदर बाढ़ का असर नहीं है, सिर्फ खेतों तक पानी पहुंचा है। कलान के एसडीएम को आजादनगर सहित उन सभी गांवों में भेजा गया है, जहां बाढ़ के दस्तक देने की आशंका है। एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित गांवों में राशन सामग्री, जीव रक्षक दवाएं एवं पशु चारा भिजवाने की व्यवस्था की जाएगी।
अमरपाल सिंह, एडीएम फाइनेंस/प्रभारी, आपदा राहत तंत्र