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गंगा एक्सप्रेस-वे : जमीन की कीमतों में उछाल, लगेंगी औद्याेगिक इकाइयां

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जलालाबाद में गंगा एक्सप्रेस-वे। संवाद
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जलालाबाद। गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद इसके आसपास की जमीन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। इस क्षेत्र के करीब डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में एक्सप्रेस-वे के किनारे हरियाणा, पंजाब समेत विभिन्न प्रांतों के लोग उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीद रहे हैं। इससे क्षेत्र में कई उद्योग धंधे लगेंगे, जिससे लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही क्षेत्र का विकास भी होगा।
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जिले से गुजरने वाले एक्सप्रेस-वे की करीब डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी के बीच जमीन की सबसे ज्यादा कीमत इस क्षेत्र के गांव कलक्टरगंज के पास बने इंटरचेंज, गुलड़िया में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे व पश्चिम दिशा में गांव पीरू के पास है, जहां हवाई पट्टी बनी है।
यहां जमीन की कीमत दस से पंद्रह लाख रुपये बीघा बताई जा रही है पहले यहां एक से डेढ़ लाख रुपये बीघा जमीन आसानी से जमीन मिल जाती थी। एक्सप्रेस-वे बनने को लेकर आवागमन का रास्ता बेहतर होने से पंजाब, हरियाणा प्रांत से आने वाले लोग जमीन खरीद रहे हैं। जहां यह लोग उद्योग धंधे स्थापित कर सकते हैं। हालांकि अभी इन क्षेत्र में किसी औद्योगिक इकाई की शुरुआत नहीं हुई है।
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जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त संजय सिंह ने बताया कि उद्योग शुरू करने वाले अलग-अलग विभाग से उद्यम लाइसेंस व एनओसी जारी कराते हैं। हमारा मुख्य कार्य उद्यमियों को प्रोत्साहन देना है।
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सुविधाजनक सफर देगा एक्सप्रेस-वे, विमानों की नाइट लैंडिंग की सुविधा
इस माह की 29 अप्रैल को संभावित उद्घाटन के बाद आम जनता के लिए खोल दिए जाने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे प्रदेश के पश्चिमी छोर से पूरब तक का सफर आसान और सुविधाजनक बना देगा। खास बात यह है कि जलालाबाद क्षेत्र में इस एक्सप्रेस-वे को वार टाइम रन वे के रूप में तैयार किया गया है।
यह देश का पहला एक्सप्रेस-वे है, जहां विमानों के लिए नाइट लैंडिंग की सुविधा है। जलालाबाद से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर गांव पीरू के पास एक्सप्रेस-वे पर साढ़े तीन किलोमीटर लंबी हवाई स्ट्रिप बनाई गई है। जहां यह स्ट्रिप बनी है। उस दूरी के बीच एक्सप्रेस-वे पर अस्थायी डिवाइडर लगाए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में सेना इन्हें हटाकर इनका इस्तेमाल कर सके।

बीते साल दो मई को वायुसेना की देखरेख में इस स्ट्रिप पर राफेल, सुखोई, मिराज, हरक्यूलिस व मिग 29 समेत विभिन्न तरह के 16 लड़ाकू विमानों की दिन व रात दोनों समय टेक ऑफ व लैंडिंग का अभ्यास कराया जा चुका है।

पाकिस्तान और चीन सीमा के नजदीक होने के कारण कई मायनों में अहम इस एयर स्ट्रिप से वायुसेना रात के दौरान भी सफल ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम होगी। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा के दौरान दवाई व अन्य जरूरी सामान तत्काल मुहैया कराने के लिए यहां हेलीकाप्टर व एयरक्राफ्ट भी उतारे जा सकते हैं। संवाद
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