विनोबा सेवा आश्रम में पुस्तक का विमोचन करते वित्त मंत्री सुरेश खन्ना। स्रोत: आश्रम
शाहजहांपुर। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि संत विनोबा गांधी के अध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे। उन्होंने अध्यात्म के क्षेत्र को अत्यधिक पोषित किया। विनोबा ने अपना जीवन गरीबों के हितार्थ समर्पित किया। 45 लाख एकड़ जमीन भूदान में मिलना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। गांधी-विनोबा का मिलन एक दैवीय संयोग था।
वह विनोबा सेवा आश्रम बरतारा में अहिंसा सभागार में आयोजित विनोबा विचार संगम गोष्ठी में बोल रहे थे। मंत्री ने कहा कि उनके जीवन का एक मात्र लक्ष्य राजनीति ही रहा। हमने उससे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। विनोबा सेवा आश्रम के कारण यहां का प्रत्येक व्यक्ति विनोबा जी के जीवन के बारे में जानता है।
आश्रम के संस्थापक रमेश भइया ने कहा कि उनके मन में बंगाल की क्रांति और हिमालय की शांति की अभिलाषा थी। इस क्रांति और शांति का संगम उन्हें गांधी में दिखा। कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य केशव चंद्र मिश्रा, लखनऊ से आए डॉ.आदर्श पांडेय, विमला बहन ने विचार रखे। मोहित कुमार ने अभिनंदन पत्र पढ़कर सुनाने के बाद मंत्री को भेंट किया। सीना शर्मा ने पुस्तक भेंट की। क्षेत्र के 11 प्रधानों व आश्रम परिवार के 11 लोगों व वृद्धाश्रम के प्रबंधक ब्रह्मदेव ने उत्कृष्ट विधायक चयन होने पर अंग वस्त्र से सम्मानित किया।
मंत्री ने आश्रम की पुस्तक का विमोचन भी किया। डॉ.सुरेश मिश्रा के संचालन में हुए कार्यक्रम में आभार डॉ.मुदित कुमार ने जताया। इस मौके पर गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ.अजय तिवारी, भोर फाउंडेशन की अध्यक्ष स्वाति सिंह, समीर सक्सेना, शहनवाज खां, अनिल गुप्ता, ब्रजेश सक्सेना, सुमन मिश्रा आदि मौजूद रहीं।