शाहजहांपुर। बदलती जीवन शैली की वजह से पित्त की थैली में पथरी की समस्या आम बात है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह समस्या अधिक है। पिछले दो साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पित्त की थैली में पथरी की समस्या से जूझने वालों ने अधिक ऑपरेशन कराएं हैं। जनवरी से फरवरी तक 91 ऑपरेशन हो चुके हैं।
पथरी की समस्या के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसकी प्रमुख वजह खानपान है। डॉक्टरों की मानें तो चिकनाई, फास्ट फूड का सेवन और कसरत न करने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा रहा है। मोटापे की समस्या होने पर कोलस्ट्राल बढ़ने से पित्त में पथरी की समस्या हो जाती है। पथरी होने पर दर्द के साथ बुखार आना और मुंह कड़वा रहने की समस्या होने लगती है। पथरी का आकार बढ़ने के बाद काफी नुकसानदायक हो जाती है। इसके चलते कैंसर होने की आशंका भी रहती है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के सर्जरी रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. विभोर जैन बताते हैं कि पित्त की पथरी के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, यह समस्या अब हर उम्र के लोगों को होने लगी है। ऑपरेशन होने पर पित्त ही निकाल दिया जाता है। इस वर्ष जनवरी में 40 और फरवरी में 51 मरीजों का ऑपरेशन किया गया।
अब तक हुए ऑपरेशन
माह वर्ष 2022 वर्ष 2023
जनवरी 54 55
फरवरी 44 64
मार्च 46 82
अप्रैल 56 68
मई 45 83
जून 45 89
जुलाई 44 47
अगस्त 49 42
सितंबर 70 53
अक्तूबर 43 63
नवंबर 85 49
दिसंबर 73 57
-
ये हैं लक्षण
-पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, बुखार, जी मिचलाना, उल्टी, पेट में सूजन, कमजोरी
दूरबीन से ऑपरेशन पर बढ़ा विश्वास
-पहले लोग चीरा वाले ऑपरेशन ही कराते थे। वह दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराने से डरते थे। उनमें भ्रांतियां थीं कि पथरी के कण अंदर रह जाते हैं। अब लोगों में दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराने को लेकर जागरूकता आई है। अगले दिन ही छुट्टी दे दी जाती है।
अनियमित दिनचर्या की वजह से मरीजों की पित्त की थैली में पथरी की समस्या बढ़ी हैं। कुछ वर्षों में समस्या बढ़ने पर ऑपरेशन कराने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। संयमित जीवन जीने से बीमारी से बचा जा सकता है। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज