शाहजहांपुर। जेल की सलाखों के पीछे निरुद्ध बंदियों को हुनर दिखाने की आजादी मिल रही है। बंदियों को स्वरोजगार के लिए सिलाई-कढ़ाई से लेकर पेंटिंग में पारंगत बनाया जा रहा है। जेल प्रशासन का प्रयास है कि यहां से निकलने के बाद बंदी अपना कारोबार शुरू कर अच्छे नागरिक का जीवन जी सके।
जिला कारागार में करीब 1200 सौ बंदी हैं। बंदियों को हुनरमंद बनाने के लिए कारागार के अंदर उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। ओडीओपी के तहत जरी-जरदोजी में सूटों पर कढ़ाई, डिजाइनदार गमले, फ्लावर पार्ट, भगवान के आसन, भगवान की पोशाकें, पर्स आदि बना रहे हैं। इस कार्य में 24 महिलाएं लगी हैं। इसी तरह पुरुष बंदी लगेज बैग आदि बना रहे हैं। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बताया कि जेल से छूटने के बाद यह महिलाएं रोजगार शुरू कर सकती हैं और अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित कर सकती हैं।
कचहरी में लगता है स्टाल
-जेल के अंदर बने विभिन्न तरह के उत्पादों का स्टाल कचहरी में लगने वाली लोक अदालत के दौरान लगाया जाता है। जेल के बंदियों के हुनर की सराहना अधिकारी भी कर चुके हैं। जेल अधीक्षक ने बताया कि कारागार के सामने जल्द ही उत्पादों का स्टाल लगाया जाएगा।
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