पुवायां (शाहजहांपुर)। देश की आजादी में शहीदों की धरा शाहजहांपुर का योगदान भला किससे छिपा है। अंग्रेजों की लाठी, गोलियां खाकर और हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले वीर शहीदों के जनपद की इस भूमि पर पंडित रामसेवक शुक्ल जैसे स्वतंत्रता सेनानी भी हुए हैं जिन्होंने देश के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
खुटार के गांव मलिका में रामनवमी के दिन 1906 में जन्म लेने वाले रामसेवक शुक्ल चार भाई, बहनों में सबसे बड़े थे। महज 13 वर्ष की आयु में ही माता-पिता के निधन के बाद वह पुवायां के मोहल्ला गढ़ी में जाकर बस गए और परिवार के पोषण के लिए चाट बेचने का काम शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने कपड़े का कारोबार शुरू किया था। भाई आत्माराम शुक्ला, बांके बिहारी लाल और बहन जगदेई की पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाते हुए उनके मन में देश की आजादी के लिए कुछ करने का जज्बा पैदा हुआ।
पुवायां में कुछ और साथी भी उनके विचारों से प्रेरित हो उनके साथ जुड़े थे। रामसेवक शुक्ल ने अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत का बिगुल फूंक दिया और नगर में प्रभात फेरी के माध्यम से अंग्रेजी राज के खिलाफ लोगों को जागरूक करने लगे। उन्होंने आंदोलन के साथ ही पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बखूबी निभाईं। खुद तो अविवाहित रहे लेकिन सभी भाई और बहन की शादी धूमधाम से की।
1941 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरित होकर रामसेवक शुक्ल ने अपने साथियों को पुवायां के देवस्थान मंदिर पर बुलाया। सुबह होते ही यहां देशभक्त एकत्र हुए और अंग्रेजों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने पहुंचे। सभी थाने पर धरने पर बैठ गए। रामसेवक शुक्ल को गिरफ्तार कर लखनऊ जेल भेज दिया गया।
जेलर से विवाद में मिली चक्की पीसने की सजा
लखनऊ जेल में तैनात जेलर लाड्डी देशभक्तों पर बर्बरतापूर्ण व्यवहार करता था। रामसेवक शुक्ल ने जेलर से इस मामले पर कड़ा प्रतिवाद किया था। जिस पर उन्हें जेल में चक्की पीसने की सजा दी गई थी। जेल से छूटने के बाद उनको पुवायां में सभा करते पकड़ा गया और सरे बाजार पिटाई कर मरणासन्न हालत में छोड़ दिया गया था। अंग्रेजों के इस अत्याचार के खिलाफ पुवायां का पूरा बाजार बंद रहा था। 1942 में उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया। इसके बाद भी रामसेवक शुक्ल ने हिम्मत नहीं हारी। देश की आजादी में योगदान के लिए उन्हें 1985 में इलाहाबाद में राजीव गांधी ने सम्मानित किया था। 1994 में मुलायम सिंह यादव और इसी वर्ष तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने सम्मानित किया था। 19 मार्च 1995 को उनका स्वर्गवास हो गया।
आज होगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसेवक शुक्ल की 26वीं पुण्यतिथि पर 19 मार्च को पुवायां के ब्लॉक सभागार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह जानकारी राजीव कुमार राजे ने दी है। उन्होंने लोगों ने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने की अपील की है।