शाहजहांपुर। विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी से लेकर सपा और कांग्रेस ने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने के साथ पुराने बिल माफ करने का वायदा किया तो सत्तारूढ़ भाजपा भी मुफ्त बिजली का लॉलीपाप देने से पीछे नहीं रही।
इसी का नतीजा है कि जनपद में तमाम उपभोक्ताओं ने पुराने बकाया की माफी मिलने की आस में नए बिलों का भुगतान भी रोकना शुरू कर दिया है। केवल शहरी क्षेत्र के विद्युत वितरण खंड द्वितीय की बात करें तो हर माह करीब 14 करोड़ रुपये की बिजली खपती है, लेकिन नियमित बिल सिर्फ पचास फीसदी उपभोक्ता जमा करते थे। अब मुफ्त बिजली देने का सियासी शोर बढ़ा तो विद्युत निगम को प्राप्त होने वाले बिजली राजस्व में करीब दस से 15 फीसदी तक कमी का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद के सभी विद्युत वितरण खंडों में विभिन्न श्रेणियों के करीब 2.71 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें शहर के लगभग 80 हजार और ग्रामीण क्षेत्र के 1.88 लाख उपभोक्ता शामिल हैं। इनके अतिरिक्त शहरी क्षेत्र में करीब 7500 और ग्रामीण क्षेत्र में तीन हजार व्यवसायिक कनेक्शन धारक भी हैं। इन पर लगभग तीन अरब रुपये विद्युत राजस्व बकाया है। गत वर्ष एक जनवरी से 15 मार्च तक पावर कारपोरेशन की ओर से शहरी क्षेत्रों के घरेलू और निजी नलकूप श्रेणी के बकाएदार उपभोक्ताओं को बकाया बिलों में ब्याज पर छूट का लाभ देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू की गई, लेकिन सिर्फ आठ फीसदी उपभोक्ताओं ने बिलों की अदायगी की।
चुनाव घोषित होने पर राजनीतिक दलों ने मुफ्त बिजली देने के साथ बकाया माफ करने जैसी लुभावनी घोषणाएं कीं तो तमाम उपभोक्ता बिल भुगतान करने से कतराने लगे। इसीलिए अब बिजली उपकेंद्रों के बिलिंग सेंटरों पर पहले जैसी कतारें भी नहीं दिख रही हैं। शनिवार को टाउनहाल में तिलक पार्क के पास खड़ी विभाग की मोबाइल बिलिंग वैन पर गिने-चुने लोग बिल जमा करने पहुंचे, जबकि वहां हर समय लाइन लगी नजर आती थी।
बिल संग्रहकर्ता अमन कुमार के मुताबिक पहले की तुलना में लोग कम आ रहे हैं और जो लोग बिल जमा कर रहे हैं, वह देय बिलों की आधी धनराशि माफ होने के बारे में ज्यादा पूछताछ कर रहे हैं, जबकि ऐसा कोई आदेश नहीं मिला। एक्सईएन सिटी प्रशांत गुप्ता भी मानते हैं कि जब तक बकाया कनेक्शन काटने का आदेश प्रभावी नहीं होगा, बिजली राजस्व की वसूली बढ़ाना कठिन होगा।
--------------------
इस माह शहरी डिवीजन से 19 करोड़ रुपये वसूली लक्ष्य के सापेक्ष 12 करोड़ रुपये बिजली राजस्व मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उपभोक्ताओं ने केवल दस करोड़ रुपये जमा किए हैं। हालांकि, माह के अंत तक बिजली राजस्व प्राप्ति बढ़ जाती है। उपभोक्ताओं को बिल जमा करने को प्रेरित किया जा रहा है। बिल कम जमा होने का सटीक कारण बता पाना संभव नहीं है, लेकिन बकाया के विरुद्घ कनेक्शन नहीं काटने के आदेश को चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह आदेश कई माह पहले जारी हुआ था।
-जितेंद्र बहादुर सिंह, अधीक्षण अभियंता, पावर कारपोरेशन
0000000000000000000000000
फोटो: 19 एसपीएनपी 02
उज्ज्वला समेत सामान्य श्रेणी के गैस सिलिंडरों की घटी मांग
शाहजहांपुर। चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए 300 यूनिट बिजली के अलावा उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को गैस सिलिंडर भी मुफ्त देने की घोषणा की है। इस कारण बाजार में घरेलू श्रेणी के सामान्य गैस सिलिंडरों की मांग भी घट गई है जबकि उज्ज्वला कनेक्शन धारक पहले से ही वर्ष में सिर्फ एक अथवा दो सिलेंडर लेकर काम चला रहे हैं।
बता दें कि जनपद में अभी तक गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले दो लाख 87 हजार 521 परिवारों की महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन के साथ मुफ्त सिलिंडर दिए गए थे। तब से सिलिंडर के दाम लगातार चढ़ने से उज्ज्वला लाभार्थी वर्ष में गिने-चुने सिलिंडर ले रहे हैं।
शाहजहांपुर गैस वितरक एसोसिएशन के सचिव अनुज गुप्ता के अनुसार अधिकतर गरीब परिवार 926 रुपये का महंगा सिलिंडर खरीदने की हैसियत नहीं रखते। इसलिए इन परिवारों के लोग खाना पकाने के लिए जंगल से बीनकर लाई गई लकड़ी और उपलों पर निर्भर हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव में सभी को गैस सिलिंडर मुफ्त दिए जाने के वायदे किए जाने से अब सामान्य श्रेणी के लोग भी सिलिंडर कम खरीद रहे हैं और गत माह की तुलना में उनकी मांग करीब 25 प्रतिशत कम हो गई है।