यह वारदात कांट थाना क्षेत्र के गांव बहादुरपुर में 15 मई 2005 की सायं
चार बजे हुई थी। यहां अपने दरवाजे पर बुजुर्ग बुद्धीपाल बैठे थे तभी भैंसी
गांव निवासी सूरज पाल और उनके तीन बेटे सर्वेश, महेश और सुशील शराब के नशे
पर वहां पहुंचे एवं उन्हें भद्दी गालियां देने लगे। विरोध करने पर चारों
ने उन्हें लाठी - डंडे से पीटने लगे। शोरगुल सुनकर पड़ोसी बचाने को पहुंचे
तो चारों ने उन्हें भी लठियाया। फिर गांव के जेराखन और रामदीन मौके की ओर
दौड़े और चारों को ललकारा तो वे बाद में आकर जान से मारने की धमकी देते हुए
भाग निकले। बुद्धीपाल समेत सभी घायलों को परिवारवाले सीधे थाने लेकर
पहुंचे और वहां रात करीब सवा नौ बजे बुद्धीपाल के बेटे सर्वेश पाल की तहरीर
पर एफआईआर दर्ज हुई। फिर सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उपचार के दौरान बुद्धीपाल की मौत हो गई। पुलिस ने तय समयसीमा में
प्रकरण में अपनी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी और 11 अगस्त 2005 को केस
सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय में स्थानांतरित हुआ। चारों आरोपियों ने अपने
पर लगे आरोपों से इंकार किया और विचारण की याचना की। सरकारी वकील संजय सिंह
तोमर द्वारा प्रस्तुत गवाहों, पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं बचाव
पक्ष के वकील के तर्क को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने अपना फैसला
सुनाया।