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UP: स्वामी चिन्मयानंद ने विश्वविद्यालय को दान दी 222 करोड़ की संपत्ति, कहा- शिक्षा से बड़ी कोई सेवा नहीं

Wed, 27 May 2026 07:18 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री चिन्मयानंद सरस्वती ने शिक्षा में बड़ा दान दिया है। उन्होंने मुमुक्षु आश्रम की 222 करोड़ की संपत्तियां स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नाम दान कर दी हैं। 
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दान पत्र अभिलेख पर हस्ताक्षर करते स्वामी चिन्मयानंद - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शाहजहांपुर जिले के शैक्षिक और आध्यात्मिक इतिहास में 27 मई का दिन स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित हो गया। मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री चिन्मयानंद सरस्वती  ने आश्रम की लगभग 222 करोड़ रुपये मूल्य की भू-संपत्तियां स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नाम दान कर दीं।

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बुधवार दोपहर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे, जहां उनके साथ क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बरेली प्रो. सुधीर चौहान, विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य, एसएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा व एसएसएमवी के सचिव अशोक अग्रवाल भी उपस्थित रहे। सब रजिस्ट्रार धर्मेन्द्र कुमार सिंह के समक्ष विधिवत दान पत्र अभिलेख पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए।

मुमुक्षु आश्रम की ओर से स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती व राज्यपाल की ओर से क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. सुधीर चौहान ने दान पत्र अभिलेख पर हस्ताक्षर किए। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य व एसएस कॉलेज एवं एसएस लॉ कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा ने गवाह के रूप में अपने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर अशोक सिंह, सुयश सिन्हा, रविशंकर बाजपेयी और रामनिवास गुप्ता उपस्थित रहे। 

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स्वामी शुकदेवानंद का सपना हो रहा पूरा- चिन्मयानंद 
दान पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद मीडिया से वार्ता करते हुए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि लगभग छह दशक पूर्व पूज्य स्वामी शुकदेवानंद महाराज ने जिस शिक्षण–साधना का स्वप्न देखा था, वह आज एक संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से मूर्त रूप ले रहा है।

उन्होंने कहा कि जब वे वर्ष 1989 में शाहजहांपुर आए थे, तब यहां के विद्यालयों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। संकल्प, सेवा और संस्कार के बल पर धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में नवजागरण का कार्य प्रारंभ किया। चिन्मयानंद ने कहा कि शिक्षा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। 
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