शाहजहांपुर। खाद्य बिक्री लाइसेंस की अनिवार्यता के विरोध में बृहस्पतिवार को उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट के पदाधिकारी एडीएम राजस्व गिरिजेश कुमार चौधरी से मिले और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
एडीएम से वार्ता करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ ने कहा कि किसान खेतों में बीज डालकर फसल पैदा करने के साथ उसे उसी प्राकृतिक स्वरूप में मंडी में बिक्री करते हैं। गल्ला आढ़ती किसान को नगद भुगतान करते हैं। उनकी उपज की बिकवाली बाद में अधिकारी नीलामी के जरिए कराते हैं। नई व्यवस्था में बीच के समय में यदि खाद्यान्न में नमी से कोई खराबी आती है तो खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों को सैंपलिंग की आड़ में उनका शोषण करने का बहाना मिल जाएगा। महामंत्री नाजिम खां ने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों की मूल स्वरूप में बिक्री करने वाले किसानों और मछुआरों को खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस लेने को बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2006 में बना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट प्रदेश में वर्ष 2011 से लागू है, लेकिन अब उसे प्रदेश सरकार मंडियों के गल्ला व्यापारियों पर थोप रही है। एक्ट की धारा तीन के तहत प्राइमरी फूड में किसान और मछुआरों के उत्पाद को शामिल नहीं किया गया है। इस कानून में किसी भी प्रकार का संशोधन करने का अधिकार राज्यों को नहीं है। कानून में बदलाव केवल संसद में प्रस्ताव पारित कर किया जा सकता है, लेकिन संशोधित कानून लागू होने पर मंडियों के गल्ला व्यापारियों को अपना कारोबार करने में कठिनाई होगी। इस मौके पर संगठन के कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता, नगर अध्यक्ष सुनील गुप्ता, युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रोहित अग्रवाल, कमाल फहीम आदि मौजूद रहे।
-
खाद्यान्न कारोबारियों की बात
खाद्य सुरक्षा लाइसेंस का गल्ला व्यापारियों से कोई लेना देना नहीं है। यह लाइसेंस उत्पादन पर होना चाहिए। गल्ला व्यापारी किसी खाद्य वस्तु का उत्पादन नहीं करते हैं। उन पर इस तरह का लाइसेंस का थोपा जाना नितांत गलत है और इसीलिए खाद्यान्न व्यापारी सरकार के आदेश का विरोध कर रहे हैं।
-अरुण कुमार गुप्ता, मंडी समिति तिलहर
-
गल्ला व्यापारी किसानों से उपज खरीदते हैं और उसे कमीशन लेकर बेच देते हैं। खाद्य सुरक्षा लाइसेंस से गल्ला व्यापारियों का कोई सरोकार नहीं है। गल्ला व्यापारियों पर खाद्य सुरक्षा विभाग के स्तर से अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है जो गलत है। गल्ला व्यापारी इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे।
-गोविंद अग्रवाल, मंडी समिति तिलहर
-
एक ही व्यापार पर मंडी के अंदर और बाहर मंडी शुल्क के दोहरे नियम से गल्ला कारोबारी पहले से परेशान हैं। इस मुद्दे को लेकर मंडियों के गल्ला आढ़ती कई दिन तक हड़ताल भी कर चुके हैं। उम्मीद थी कि इस समस्या का समाधान जल्द हो जाएगा, लेकिन सरकार ने नई मुसीबत दे दी।
-कुलदीप गुप्ता, मंडी समिति रोजा
-
मंडी के खाद्यान्न कारोबारी लंबे समय मंडी शुल्क माफ करने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने इस पर अनुकूल निर्णय करने के बजाय खाद्य सुरक्षा विभाग के बिक्री लाइसेंस की बाध्यता लागू कर दी, जिससे कारोबारी दिक्कतें बढ़नी तय हैं। जरूरत पड़ी तो जिले के कारोबारी मुख्यमंत्री दरबार में अपनी समस्या रखेंगे।
-उमाशंकर गुप्ता, मंडी समिति रोजा
-
मंडी के खाद्यान्न आढ़ती अनाज का कारोबार करते हैं, किसी खाद्य वस्तु का नहीं। किसानों से अनाज खरीदकर उसे कमीशन लेकर बिक्री करने तक गल्ला आढ़तों की भूमिका सीमित है। इसलिए खाद्यान्न व्यापारियों पर जबरन खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस थोपना जायज नहीं है।
-शिव गोपाल गुप्ता, मंडी समिति रोजा