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नमूने लेने के लिए फूड प्वॉयजनिंग का इंतजार!

Tue, 24 Feb 2015 08:00 PM IST
शाहजहांपुर।
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 खान-पान की वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग दूध, मिठाइयों, किराना की वस्तुओं आदि के नमूने लेने का अभियान तभी छेड़ता है जब प्रदेश में लोगों के बीमार पड़ने की कहीं कोई बड़ी घटना होती है या फिर होली-दीपावली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले। अब होली नजदीक आने के साथ दूध और मिठाइयों में मिलावट का धंधा जोर पकड़ने लगा है, लेकिन सैंपलिंग अभियान शुरू नहीं होने से यही लग रहा कि विभाग को फूड प्वॉयजनिंग के किसी बड़े मामले का इंतजार है।
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45 रुपये लीटर असली दूध की मिलती गारंटी
शहर में रोजाना करीब तीन सौ से ज्यादा दूधिए बाइक और साइकिलों पर कंटेनर लादकर अलग-अलग रेट से दूध बेचते हैं। 30 रुपये से लेकर 45 रुपये लीटर तक रेट तय कर रखे हैं। दूध में प्योरिटी की गारंटी हाई रेट पर ही मिलती है, जबकि लैक्टोमीटर उसमें भी पानी की मिलावट पकड़ रहा है। दूध में झाग और गाढ़ापन लाने के लिए वॉशिंग पाउडर, सफेदा, मैदा जैसी चीजों का घालमेल किए जाने की शिकायतें जोर पकड़ रही हैं, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है।

बाजार में कई भाव पर बिक रहा बेसन   
किराना व्यापारियों ने दूध की तरह बेसन के भावों की भी ग्रेडिंग तय कर रखी है। मतलब यह कि बेसन में मटर की मिलावट जितनी कम, उसका भाव उतना ही अधिक। बहादुरगंज की गल्ला मंडी में ऐसा धड़ल्ले से हो रहा है। दुकानदार फुटपाथ पर खुलेआम अलग-अलग क्वालिटी वाले बेसन की बोरियां लगाकर उनकी बिक्री कर रहे हैं। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे मामले बहुत कम नजर आते।
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चालू वित्त वर्ष में लिए गए सिर्फ 129 नमूने
जिले में दूध, मिठाइयां, किराना, होटल, रेस्टोरेंट आदि खान-पान वाले दो दर्जन से अधिक व्यवसायों से दस हजार लोग जुड़े होने का अनुमान है, लेकिन नमूने लेने की कार्रवाई बेहद सुस्त है। उदाहरणार्थ, चालू वित्त वर्ष में गत एक अप्रैल से इस वर्ष 31 जनवरी तक विभिन्न खाद्य वस्तुओं के केवल 129 नमूने लिए जा सके। फरवरी के सात नमूनों में नमक के चार और दूध का केवल एक है जबकि मिलावट की ज्यादातर शिकायतें दूध को लेकर हैं।

47 मुकदमे दर्ज, दो मामलों में हुई सजा
विभाग के अधिकारी अब तक हुई सैंपलिंग की कार्रवाई को पर्याप्त मान रहे हैं। उनके मुताबिक गत एक अप्रैल से अब तक 77 छापे डालकर 454 दुकानों का निरीक्षण किया जा चुका है। जो सैंपल जांच में फेल हो गए, उनसे संबंधित 47 मामलों मेें खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की विविध धाराओं केतहत मुकदमे दायर किए गए। मिलावट के दोषी पाए गए 18 लोगों 1.40 लाख रुपये जुर्माना वसूल किया गया। जुर्माना नहीं देने पर दो अन्य विक्रेताओं को कारावास की सजा हुई।

स्टाफ की कमी से
सैंपलिंग में दिक्कत
‘हर तहसील में एक-एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी होना चाहिए, लेकिन जिले में केवल दो एफएसओ तैनात हैं। हाल ही में आए युगल किशोर को सदर केसाथ जलालाबाद और आरपी गंगवार को तिलहर केसाथ पुवायां का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। रुटीन का सैंपलिंग अभियान जारी है। अफसरों से निर्देश मिलने पर दूधियों और खोया मंडी पर छापेमारी का अभियान छेड़ दिया जाएगा।’  
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-डॉ. टीआर रावत, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
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