पाला, कोहरा और सर्दी के कारण आलू की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है। किसान आलू के फसल खराब होने से काफी परेशान हैं।
पुवायां क्षेत्र में धान, गन्ना, गेहूं के साथ आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। इस वर्ष भी आलू की खेती बड़े पैमाने पर की गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि धान की खेती में हुए नुकसान की भरपाई आलू से हो सकेगी। जिन किसानों ने अगेती आलू बो रखा था, उन्होंने आलू खुदवाकर बाजार में भिजवा दिया, लेकिन जो किसान आलू की बुवाई करने में पीछे रह गए थे वह फसल खराब होती देख परेशान हैं। किसानों ने बताया कि पाला गिरने से आलू की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। जबकि आलू अबतक पक नहीं पाया है। ऐसे में आलू कम बैठने का अनुमान है। ऐसा होने पर उन्हें कर्ज आदि तक चुकता करना मुश्किल हो जाएगा।
सरसों अनुसंधान निदेशालय भरतपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विकास शर्मा का इस संबंध में कहना है कि किसानों को नजदीकी वैज्ञानिकों से फसल का मुआयना करा लेना चाहिए। आलू की पत्तियां खराब होने का कारण पाले के अलावा कोई रोग भी हो सकता है। पत्ती खराब होने से पौधे को भोजन नहीं मिलेगा जिससे फसल प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि यदि पाले के कारण फसल खराब हो रही है तो किसानों को गंधक का एक लीटर तेजाब एक हजार लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर खेत में छिड़कना चाहिए। इससे लाभ होगा।