शाहजहांपुर/परौर। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के बांधों-बैराजों से 2.49 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस कारण जिले से होकर निकलने वालीं गंगा और उसकी सहायक नदी रामगंगा में मंगलवार को दूसरे दिन जलस्तर बढ़ गया। उधर, परौर क्षेत्र में उफना रही रामगंगा लगातार फैलाव ले रही है। इससे दोनों नदियों के तट पर बसे गांवों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर खासे परेशान हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नरौरा बैराज से गंगा में 225245 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की यह मात्रा बीते दिन की तुलना में लगभग पांच हजार क्यूसेक कम हुई लेकिन दो दिन पहले नरौरा से छूटा 2.30 लाख क्यूसेक पानी हजरतपुर (बदायूं) होकर जिले की सीमा में आया तो सोमवार देर रात से मिर्जापुर ब्लॉक के ढाई घाट से लेकर कलान के भैसार बांध तक गंगा में उफान आ गया।
इसी प्रकार हरेली, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से रामगंगा में 24535 क्यूेसक पानी छोड़ा गया जो बीते दिन की तुलना में 40 प्रतिशत कम है, बावजूद इसके रामगंगा परौर से लेकर अल्हागंज के गांवों तक फैलाव ले रही है।
सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार बदायूं के कछला घाट पर गंगा का जलस्तर दो दिन से असामान्य बना हुआ है। इसीलिए वहां से अतिरिक्त पानी की खेप जिले में आने के कारण यहां भी गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा का जलस्तर लगातार दूसरे दिन 1.38 मीटर बढ़कर 159.46 मीटर हो गया। इसी वजह से जिले में जैतीपुर से लेकर परौर होते हुए अल्हागंज तक रामगंगा तटवर्ती गांवों के लिए खतरा बन गई है।
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आजादनगर और इस्लामनगर गांवों को खतरा
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा का जलस्तर सोमवार रात से लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ का पानी आजाद नगर और इस्लामनगर गांवों की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो उनके गांव पानी से घिर जाएंगे। आजाद नगर को तीन तरफ से गंगा की बाढ़ घेर रही है। फिलहाल, गांव से बाहर निकलने के लिए एक कच्चा रास्ता खुला है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो यह रास्ता भी बंद हो जाएगा और उन्हें घरों से पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए न तो कोई व्यवस्था की और न ही बाढ़ से सचेत करने की अग्रिम सूचना दी है। यदि इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो गांव से ब्लॉक और तहसील मुख्यालय जाने वाला इकलौता चौंरा-कमथरी मार्ग भी बंद हो जाएगा।
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परौर में कटान से बेघर हो चुके परिवार परेशान
परौर। क्षेत्र में गत वर्षों में रामगंगा में आई बाढ़ उतरने पर भूमि कटान से बेघर हो चुके परिवार नदी में उफान आने से परेशान हैं। अभावों की जिंदगी जी रहे इन लोगों का कहना है कि मकान पहले ही तबाह हो चुके हैं और अब बाढ़ विकराल हुई तो उनके झोपड़े भी बह जाएंगे और उन्हें सिर छिपाने को ठिकाना नहीं बचेगा। बीते दो दशक के दौरान परौर के मजरा नरायननगर पूर्वी व मंझा रामगंगा की लहरों में कटकर तबाह हो गए थे। इन मजरों के अधिकतर बाढ़ प्रभावित लोगों के अब तक मकान नहीं बना पाए हैं। आर्थिक रूप से सक्षम कुछ लोग मकान बना चुके हैं, लेकिन अन्य लोग सड़क किनारे झोपड़ी डाल कर जीवन निर्वाह कर रहे हैं या फिर अपनें रिश्तेदारों और परिचितों के यहां शरण लिए हैं। हालांकि, उनकी चिंता को भांपकर सिंचाई विभाग ने जिओ बैग के अस्थायी तटबंधों का निर्माण कार्य तेज करा दिया है। तटबंध निर्माण कार्य की जनपद मुख्यालय या फिर लखनऊ में निगरानी के लिए कार्य स्थल पर वेब कैमरा लगाया गया है। बरेली की कार्यदायी संस्था एमएस रोड लाइन के डायरेक्टर मोहन राजपूत ने बताया तटबंधों का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने के लिए श्रमिकों की संख्या बढ़ा दी गई है। संवाद
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गर्रा और खन्नौत के जलस्तर में आई कमी
ड्यूनी डॉम से गर्रा में पानी की निकासी दो दिन से लगातार घट रही है। ड्यूनी से केवल 406 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस वजह से गर्रा का जलस्तर बीते 24 घंटे की तुलना में 15 सेमी कम होकर 143.75 मीटर रह गया है। क्षेत्र में बारिश का पानी समेटने वाली खन्नौत भी पांच सेमी घटकर 142.50 मीटर पर बह रही है क्योंकि सोमवार सुबह से बरसात थमी हुई है।
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यही स्थिति रही तो सुरक्षित स्थान पर डालना पड़ेगा डेरा
गंगा का पानी गांव की ओर बढ़ रहा है और इससे घरों तक पानी पहुंचने की आशंका है। इसी तरह गंगा बढ़ती रही तो पिछले वर्षों की तरह एक बार फिर परिवार सहित घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर डेरा डालना पड़ेगा।
-मो खलील, आजादनगर
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पैलानी उत्तर ग्राम पंचायत के अधिकांश मजरे बाढ़ से प्रभावित होते हैं। पानी बढ़ने पर इस्लामनगर, आजादनगर और मस्जिद नगला ज्यादा प्रभावित होंगे। पिछले साल भी बाढ़ में आजाद नगर जलमग्न हो गया था।
-फारुक अली, पैलानी उत्तर
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आजाद नगर के लिए कोई सड़क नहीं है। बाढ़ आते ही गांव चारों तरफ से पानी से घिर जाता है। तब गांव से निकलने के लिए नाव का ही सहारा रहता है। गांव का लिंक रोड ऊंचा हो जाए तो समस्या का समाधान होगा।
-मो. रफी, इस्लाम नगर
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गंगा के खादर में बसी पैलानी उत्तर ग्राम पंचायत के मजरा आजादनगर में अधिकांश छप्परदार घर ही हैं। प्रशासन छप्परों में रहने वाले सभी ग्रामीणों को आवास मुहैया करवाए तो बाढ़ में जीवन यापन आसान हो जाएगा।
-रिजवान अहमद, इस्लाम नगर
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कलान तहसील के अधिकांश गांव भैंसार बांध के कारण गंगा की बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। गंगा में अभी इतना पानी नहीं आया है कि मिर्जापुर क्षेत्र के गांवों को कोई खतरा हो। परौर क्षेत्र के गांवों को रामगंगा की बाढ़ से बचाने के लिए जिओ बैग के तटबंधों का निर्माण तेज करा दिया गया है। कार्य की निगरानी व गुणवत्ता जांच के लिए दो सहायक अभियंता और सात अवर अभियंताओं की टीम लगाई गई है।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग