शाहजहांपुर/मिर्जापुर। बारिश का दौर थमा होने के कारण गंगा और रामगंगा के जलस्तर में गिरावट मंगलवार को भी जारी रही। इसी के साथ बाढ़ से सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित हुए परिवार अपने घरों को लौट आए हैं। अब उन किसानों को सरकार से मुआवजा के तौर पर आर्थिक सहायता मिलने का बेसब्री से इंतजार है, जिनकी फसलें 15 दिन से पानी में डूबी होने के कारण नष्ट हो गईं हैं। चूंकि, गंगा के तटवर्ती गांवों के खेतों से अभी तक पानी निकल नहीं सका है। इसलिए फसली नुकसान के सर्वे में बाधा पड़ रही है और इसे देखते उन्हें मुआवजा मिलने में अभी वक्त लगेगा।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मंगलवार सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार बैराजों से पानी की निकासी लगातार कम होने से नदियों का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है। बीते 24 घंटे के दौरान कलान क्षेत्र में भैंसार बांध पर गंगा तीन सेमी और बरेली के चौबारी घाट से लेकर परौर क्षेत्र तक रामगंगा 40 सेमी घट गई है। नरौरा से रिलीज पानी की मात्रा कम होकर 21470 क्यूसेक रह गई है और इसे देखते गंगा के जलस्तर में गिरावट जारी रहने का अनुमान है। रामगंगा घटने से परौर क्षेत्र के तटवर्ती गांव मोहनपुर, नारायणनगर पश्चिमी, मंझा आदि गांवों की कृषि भूमि पर मंडरा रहा कटान का खतरा भी टल गया है। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार बीते तीन दिन की तुलना में महानगर के पास खन्नौत नदी में पानी थोड़ा बढ़ा, लेकिन कल तक इसमें भी पानी कम होने के आसार हैं।
धीमी गति से सूख रहा खेतों में भरा पानी
मिर्जापुर। बाढ़ प्रभावित खेतों में भरा पानी धीरे-धीरे सूखने लगा है। अब एक दो दिन में गंगा की कटरी में बाढ़ से नष्ट हुई फसलों का सर्वे शुरू कर दिया जाएगा। ग्राम पंचायत पैलानी उत्तरी के लेखपाल सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि फसल बीमा योजना वाली कंपनी के कर्मचारी भी अपने स्तर से फसली नुकसान का सर्वे करने आएंगे, किंतु बीमा कंपनी के कर्मचारी यह स्पष्ट नहीं कर सके, कि बाढ़ से नष्ट हुई सभी फसलों का क्लेम दिया जाएगा या सिर्फ बीमित फसलों का। बाढ़ पीड़ित ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के प्रधान फारूक अली और सपा नेता रिजवान अहमद का कहना है कि कटरी इलाके के अनपढ़ किसान अपना बीमा कराना नहीं जानते हैं और ऐसे में फसल बीमा करवाना तो बहुत दूर की बात है।
नदियों के किनारे वाले खेतों में पानी भरा होने से फसल सर्वे शुरू होने में अभी कुछ दिन और लगेंगे। बाढ़ से हुई फसली क्षति का मुआवजा किसानों को दोहरी व्यवस्था के तहत दिया जाएगा। बीमित फसलों का मुआवजा बीमा कंपनी अपने सर्वे के आधार पर देगी। जिन किसानों ने फसल बीमा योजना का लाभ नहीं लिया, लेकिन जिनकी फसलें जलभराव से खराब हुईं या हो रही हैं, उन्हें राजस्व विभाग के स्तर से मुआवजा दिया जाएगा। यह शासन से तय होना है कि किस फसल का कितना मुआवजा दिया जाना है।
- डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी