जलालाबाद। अल्हागंज से खंडहर तक करीब 20 किमी के दायरे में रामगंगा और बहगुल नदियों के तटवर्ती इलाके में फिर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। वहां बसे गांवों में बाढ़ में जलमग्न होकर बर्बाद हुई तिल, उर्द, बाजरा और लतावर्गीय फसलोंं के बाद किसानों को धान की फसल बचने की उम्मीद थी, लेकिन तेज अंधड़ के साथ बारिश में धान गिर जाने से किसान मायूस हैं।
बाढ़ प्रभावित बलदेवपुर के राजवीर सिंह, हरिनाम, कसारी गांव के राजेश, बलवीर और अर्जुन, उइला के राजीव सिंह, कटरिया के ओमकार वर्मा आदि ने बताया कि बारिश ने धान की फसल चौपट कर दी है। कई खेतों में फसल गिरने के बाद पानी में डूब गई है। बाढ़ से कई जगह क्षतिग्रस्त हुईं पुलिया और रास्तों पर पानी भर जाने से आवागमन कठिन हो गया है। गांव के आसपास के निचले हिस्से, तालाब, नाले आदि आदि भर जाने से पानी गांवों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को पशुओं के चारे-भूसे सहित परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा कर पाना मुश्किल हो गया है।
बारिश से नगर के हालात भी खराब हो चले हैं। शनिवार को बाजार में अघोषित बंदी रही। बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों में दिनभर सन्नाटा रहा। आंबेडकरनगर, गांधीनगर, खेड़ा, प्रेमनगर आदि मोहल्लों की कई गलियों में जलभराव हो गया। बारिश नहीं थमने से रामताल मार्ग पर निर्माणाधीन पुलिया का कार्य दो दिन से बंद है।