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Shahjahanpur News: बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने सरकारी सहायता नहीं मिलने पर प्रदर्शन

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जलालाबाद के चचुआपुर में प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
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शाहजहांपुर / जलालाबाद। बांधों और बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी बहुत कम होने के बावजूद रामगंगा नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बहने से आसपास के निचले क्षेत्रों की बसावट वाले गांवों में पानी कम नहीं हो रहा है। रामगंगा की बाढ़ से अब भी करीब एक दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हैं, लेकिन वहां के लोगों को प्रशासन से अब तक कोई राहत सहायता नहीं मिल सकी है। इसके विरोध में चचुआपुर गांव में वहां के लोगों ने मंगलवार को नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
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सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार रामगंगा समेत सभी नदियों में पानी घट रहा है। बताया गया कि सोमवार की रात आठ बजे की तुलना में मंगलवार को शाम चार बजे तक कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर पांच सेमी घटकर 143.05 मीटर हो गया और वह खतरे के निशान से 60 सेमी नीचे आ गई है।
इसी अवधि में गर्रा 20 सेमी घटकर 146.95 मीटर पर बह रही है। गर्रा खतरे के निशान से 2.85 मीटर नीचे आ चुकी है। खन्नौत नदी भी तेजी से सिमट रही है और 10 सेमी घटकर 145.10 मीटर पर बह रही है। खन्नौत भी खतरे के निशान से 65 सेमी नीचे आ चुकी है, लेकिन अल्हागंज क्षेत्र के डबरी घाट पर रामगंगा 28 सेमी घटकर 137.37 मीटर पर आ गई है। इसके बावजूद रामगंगा अब भी खतरे के निशान से सात सेमी ऊपर बह रही है।
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बलदेवपुर, मंझारा, शाहपुर, हथिनापुर, एलमनगर, कटरिया, संगहा, उइला थाथरमई आदि एक दर्जन से ज्यादा गांव अब तक बाढ़ से घिरे हैं और इन गांवों की हजारों एकड़ फसलें अब तक डूबी हुई हैं। खंडहर क्षेत्र के गांव मगटोरा, मडै़या, चचुआपुर आदि गांवों के विस्तृत क्षेत्र में भी काफी गहराई तक जलभराव बना हुआ है। इन गांवों के विकास सिंह, रोहित सिंह, पातीराम कश्यप, मनभावन कश्यप, रामभजन वर्मा, आकाश सिंह, मृगेंद्र आदि का आरोप है कि उनके क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति विकराल होने के बाद भी किसी तरह की कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची।
तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि रामगंगा में पानी लगातार कम हो रहा है। निचले इलाकों में नदियों का पानी तालाब और नालों आदि में भर गया है और उसे निकलने में समय लगेगा। उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार सभी प्रभावित परिवारों को बाढ़ राहत सहायता दी जा रही है। फसली नुकसान का सर्वे खेतों से पानी निकलने के बाद होगा और तभी मुआवजा तय हो सकेगा।
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