शाहजहांपुर। वित्तीय वर्ष 2025-26 पांच दिन बाद समाप्त हो जाएगा। कई सरकारी विभाग मिले बजट को खर्च नहीं कर पाए हैं। अब बजट खपाने के लिए सरकारी विभागों में माथापच्ची तेज हो गई है। बिल और वाउचर बनाकर कोषागार में भेजे जा रहे हैं। इनकी जांच करने में विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात जुटे हुए हैं।
जिले के कई काम इस वित्तीय वर्ष में भी स्वीकृति के बाद अधूरे पड़े हैं। इसमें लिपुलेख-भिंड हाईवे पर काम अधूरा है। वित्तीय वर्ष की समाप्त होने की ओर है। विभिन्न विभागों के बिल-वाउचर की फाइल जिला कोषागार कार्यालय पहुंच रही हैं। देर रात तक कर्मचारी और अधिकारी कागजों की जांच में जुटे हुए हैं।
कई विभागों पर करोड़ों रुपये का बजट बकाया है। सरकार की ओर से विकास कार्य के लिए मिले बजट को विभाग खर्च नहीं कर पाए हैं। अब स्थिति यह हो गई कि कामों का आवंटन कर बजट की स्वीकृति कराई जा रही है। इससे उनका बजट फिर से सरकार के खजाने में जाने से बच सके।
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पीडब्ल्यूडी का सबसे अधिक बकाया बजट
सरकार सड़कों के निर्माण पर सबसे अधिक जोर दे रही है। सड़कों के निर्माण में सबसे अहम भूमिका लोक निर्माण (पीडब्ल्यूडी) की होती है। वित्तीय वर्ष में विभाग को पांच अरब 59 करोड़ 62 लाख 84 हजार 526 रुपये का बजट मिला था। इसमें चार अरब, 68 करोड़ 56 लाख 38 हजार 084 रुपये निर्माण कार्याें में व्यय किया गया। अब भी विभाग के पास 91 करोड़ 6 लाख, 46 हजार 442 रुपये का बजट बकाया है। सिंचाई विभाग को 67 करोड़ 60 लाख 59 हजार 287 रुपये का बजट मिला था। इसमें से 63 करोड़ 59 हजार 160 रुपये व्यय हुआ। चार करोड़ 60 लाख 127 रुपये का बजट बकाया है। चिकित्सा विभाग को दो अरब 17 करोड़ 40 लाख छह हजार 583 रुपये के बजट का आवंटन हुआ था। इसमें दो करोड़ 17 लाख दो हजार छह रुपये व्यय किया गया। शिक्षा विभाग को आठ अरब 96 करोड़ 75 लाख 55 हजार 587 रुपये का आवंटन हुआ है। इसमें आठ अरब, 65 करोड़ 54 लाख 17 हजार 251 रुपये का व्यय हुआ। 31 करोड़ 21 लाख 38 हजार 336 रुपये शेष हैं।
इसी तरह जिला प्रशासन को एक अरब 17 करोड़ दो लाख 66 हजार 708 रुपये का बजट आवंटित हुआ, जिसमें से 1 अरब तीन करोड़ चार लाख 20 हजार 570 रुपये व्यय हुए। 13 करोड़ 98 लाख 46 हजार 138 रुपये बकाया हैं। पुलिस प्रशासन को दो अरब 94 करोड़ 59 लाख 36 हजार 986 रुपये का आंवटन किया गया। दो अरब 87 करोड़ 91 लाख 39 हजार 547 रुपये व्यय हुए। 6 करोड़ 67 लाख 97 हजार 439 रुपये शेष बच गए है।
विकास विभाग को 59 करोड़ 84 लाख 58 हजार 889 रुपये का बजट आवंटित हुआ। इसमें 58 करोड़ 54 लाख 61 हजार 246 रुपये शेष बच गए। पंचायती राज विभाग को एक अरब, 36 करोड़ 24 लाख 58 हजार 137 रुपये का बजट आवंटित हुआ। इसमें एक अरब, 35 करोड़ सात लाख 10 हजार चार रुपये का बजट व्यय हुआ। एक करोड़ 17 लाख 48 हजार 133 रुपये का बजट शेष रह गया है।
कई विकास कार्य बजट की स्वीकृति के बाद भी अधर में
लाल इमली चौराहा पर अहमद उल्ला शाह पार्क से लिबास टेलर तक ग्रीन रोड का निर्माण कराया जा रहा है। दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद अब भी कार्य अधर में हैं। इसी तरह से सिंचाई विभाग की बाढ़ से बचाव के लिए छह परियोजनाएं भी पूृरी नहीं हो पाईं हैं। लखनऊ-पलिया हाईवे को निर्माण की समय सीमा आठ माह पहले निकल चुकी लेकिन अभी निर्माण कार्य अधर में है। इसी तरह जनपद में कई विकास कार्य अधूरे हैं।
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने की ओर है। जो विभाग अपने बजट को खर्च नहीं कर पाए हैं, वे अपने बिल-बाउचर बनाकर भेज रहे हैं। इससे समय रहते बजट का इस्तेमाल संभव हो सके। कार्यालय में दिन-रात काम चल रहा है।
- अमरेश बहादुर पाल, जिला वरिष्ठ कोषाधिकारी