शाहजहांपुर। आए दिन अस्पतालों में हो रही अग्निकांड की घटनाओं से स्वास्थ्य विभाग ने सबक नहीं लिया है। यहां भी कई निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी के इंतजाम पूरे नहीं हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी इंतजाम अधूरे हैं। फिलहाल 3.88 करोड़ रुपये के बजट से आग से बचाव के संसाधन जुटाए जा रहे हैं।
रविवार रात जयपुर में अस्पताल में आग लगने से छह लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले पिछले वर्ष नवंबर महीने में झांसी के अस्पताल में अग्निकांड के बाद आग से बचाव को लेकर फायर ब्रिगेड ने अभियान शुरू किया।
अधिकतर निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया गया। इसके विपरीत विभिन्न निजी अस्पतालों में आग लगने पर संसाधन फेल होने की आशंका बनी रहती है। इसी तरह राजकीय मेडिकल कॉलेज तक में आग से बचाव सिर्फ अग्निशमन यंत्रों पर निर्भर है।
सीएचसी-पीएचसी पर उपकरण लगे हैं, लेकिन चलाने का तरीका नहीं पता है। हालांकि, राजकीय मेडिकल कॉलेज में तीन करोड़ 88 लाख रुपये के बजट से आग से बचाव के संसाधन को जुटाया जा रहा है। यहां पर काफी तेज गति से काम हो रहा है।
एफएसओ डॉ.बीएन पटेल ने बताया कि लगातार निरीक्षण कर निजी अस्पतालों में अग्निकांड से बचाव के संसाधन पूरे कर लिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में कार्य चल रहा है। नियमित चेकिंग अभियान भी चलता रहता है।
ये हैं मानक
-25 से 50 हजार लीटर पानी की टंकी, हौज रील, स्प्रिंकलर, फायर अलार्म, पाइप लगा होना चाहिए। मानक के तहत दो सौ वर्ग मीटर में एक अग्निशमन यंत्र लगना चाहिए।
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आतिशबाजी की दुकानों की जांच की
दीपावली को देखते हुए एफएसओ डॉ.बीएन पटेल ने आतिशबाजी की दुकानों की जांच शुरू कर दी है। शहर से लेकर देहात तक पंजीकृत लाइसेंस धारकाें की दुकानाें व गोदामों पर सुरक्षा व्यवस्था को जांचने का अभियान चल रहा है।