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धूल फांक रहे हैं विकास भवन के अग्निशमन यंत्र

Wed, 14 Jan 2015 11:41 PM IST
शाहजहांपुर।
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35 से अधिक कमरों में दो दर्जन विभागों का रिकार्ड समेटे विकास भवन परिसर में आग लगने पर उसे बुझाना कठिन हो सकता है। वजह, वहां के तीनों तलों पर लगाए गए तीन दर्जन अग्निशमन यंत्र अपनी जगह से गायब हैं। दीवारों पर उन्हें टांगने के लिए बनाई गईं खूटियां गवाही दे रही हैं कि वहां कभी फायर टेंडर लगे थे। यह हाल तब है जब विकास भवन के दफ्तरों में एक दशक मेें बिजली के शार्ट सर्किट से तीन बार आग लग चुकी है।
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20 जुलाई, 93 को तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा द्वारा विकास भवन का लोकार्पण किए जाते वक्त बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर समेत ऊपर की दोनों मंजिलों पर 12-12 अग्निशमन यंत्र लगाए गए थे। करीब दस साल पहले बिल्डिंग के पूर्व-दक्षिण कोने पर स्थित उद्यान विभाग के दफ्तर में आग लगने पर ये उपयोगी साबित हुए। हालांकि, उस वक्त भी कई सिलेंडरों में भरा मैटेरियल खत्म हो चुका था।
इसके बाद भी दो बार विकास भवन के पूर्वी गेट के पास शार्ट सर्किट से आग लग चुकी है। बमुश्किल डेढ़ साल पहले इसी जगह लगी आग बिजली के तारों के सहारे ऊपर तक पहुंच गई। तब आग को बुझाकर पड़ोस के गन्ना, बाल विकास आदि विभागों के कार्यालयों का रिकार्ड जलने से बचा लिया गया। अंतत: वर्ष 2012 में तत्कालीन सीडीओ अशोक अग्रवाल के कार्यकाल में सारे अग्निशमन यंत्र उखाड़कर स्टोर रूम में डाल दिए गए।
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मोनो अमोनियम फास्फेट रोकता है आग
अग्निशमन यंत्र के सिलेंडर मेें नाइट्रोजन गैस के साथ मोनो अमोनियम फास्फेट नामक रासायनिक पाउडर भरा जाता है। यही पाउडर आग की लपटों को बढ़ने से रोकता है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह के अनुसार नाइट्रोजन गैस मोनो अमोनियम फास्फेट के लिए उत्प्रेरक का काम करती है।

‘अग्निशमन यंत्रों के खाली सिलेंडर भराने केलिए ग्राम्य विकास आयुक्त को दो लाख रुपये की डिमांड करीब एक साल पहले भेजी जा चुकी है। धनराशि नहीं मिलने पर सिलेंडर समेत सभी फायर हाइड्रेंट स्टोर में रख लिए।’
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- सुशील सक्सेना, नाजिर एवं केयर टेकर, विकास भवन
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