भारतीय जनता पार्टी के युवा सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा जजी परिसर के पास ढोल-नगाड़े और लाउडस्पीकर बजाकर न्यायिक कार्य बाधित किए जाने के मामले में एक अधिवक्ता ने डीएम और एसपी को जवाबदेह माना है। उन्होंने दोनों अफसरों के विरुद्ध अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन तेंद्र पाल के न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या 24 में प्रकीर्ण वाद दायर कराया है। जजी कंपाउंड के अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि एक दिसंबर को दिन में 11 बजे के बाद से निरंतर ढोल-नगाड़े, लाउडस्पीकर के शोर और अत्यधिक जनसमूह के भयंकर कोलाहल के फलस्वरूप न्यायिक कार्य पूर्णत: बाधित हुआ। इस कारण वह सुचारु रूप से वादों की पैरवी नहीं कर सके, जिससे उन्हें क्षति हुई और मानसिक आघात पहुंचा। याची चंदेल ने कहा कि ढोल-नगाड़े और लाउडस्पीकर बजाने के साथ सामूहिक भीड़ निकालने संबंधी स्वीकृति का दायित्व डीएम और उनके अधीनस्थों का है। इसलिए यह पूर्ण रूप से सुनिश्चित होना चाहिए कि उक्त कृत्य से किसी न्यायिक कार्य में बाधा अथवा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। किन परिस्थितियों में जनसमूह को ऐसा करने की स्वीकृति दी गई, और यदि नहीं दी गई तो यह अपकृत्य कैसे हुआ। प्रार्थना पत्र में न्यायालय से अनुरोध किया गया कि न्यायिक कार्य के दौरान पीडब्ल्यूडी चौराहे की सड़क से लेकर डॉ. सुदामा प्रसाद स्कूल केे चौराहे तक इस प्रकार के आयोजनों पर अंकुश लगाकर आवश्यक कार्यवाही की जाए। अपर सिविल जज तेंद्र पाल ने यह प्रकरण प्रकरण वाद के तौर दर्ज किए जाने की अनुमति देने के साथ प्रतिवादियों को छह दिसंबर तक रिपोर्ट न्यायालय में भेजने का आदेश दिया है।