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हमशक्ल गेहूंसा मामा से गेहूं परेशान

Mon, 25 Jan 2016 08:51 PM IST
अमर उजाला, शाहजहांपुर
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जिला कृषि विभाग के इस वर्ष बुआई वाले रकबे के तैयार ब्योरे के अनुसार, शाहजहांपुर में कुल दो लाख 61 हजार 893 हेक्टेयर खेत में गेहूं की फसल बोई गई है। हाल में कराए गए विभागीय अध्ययन में करीब 40 फीसदी अर्थात एक लाख चार हजार 757.2 हेक्टेयर गेहूं वाले खेत में गेहूंसा मामा उगे हुए हैं। अनुमान के अनुसार इस मामा का तत्काल इलाज न किए जाने पर करीब 30 से 40 फीसदी तक गेहूं की उपज इस बार प्रभावित होगी। कृषि अधिकारियों के अनुसार, करीब ढाई दशक पहले विदेशों से मंगाए गए गेहूं के बीज के साथ गेहूंसा के दाने भी चले आए थे। तब से जहां वह बीज बोया गया, वहां के खेतों की माटी में यह दबा रह गया है। गेहूं के फसल के अनुकूल मौसम में यह जमीन में अंकुरित होता है। इसके एक बाली में असंख्य दाने होते हैं और पौधे के संपूर्ण विकसित होने पर वही दाने झड़कर खेतों की माटी में दबे रह जाते हैं। कृषि विभाग की किसानों को जारी सलाह में गेहूंसा की निराई कराने पर फोकस किया है।
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ऐसे पहचाने गेहूंसा को
अंकुरित होकर तीन से पांच ईंच की ऊंचाई तक का पौधा होने तक गेहूं और गेहूंसा एक से ही दिखते हैं। इनमें फर्क जांचने को गीली माटी वाले खेत में से पौधे को हल्के से उखाड़ना पड़ता है। गेहूं की जड़ पीली और सफेद मिश्रित होती है जबकि गेहूंसा की जड़ गुलाबी रंग की होती है।

मामा के नाम से किसानों में मशहूर गेहूंसा नामक खरपतवार पर नियंत्रण के लिए जरूरी होता है कि गेहूं की पहली सिंचाई के समय सल्फो सलफ्यूरान 75 फीसदी वाले की 13.5 ग्राम मात्रा को दो से ढाई सौ लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाएं। फिर उसका फ्लैट फैन नोजल से खेत में छिड़काव करें। पहली सिंचाई का समय बीत चुका हो तो निराई ही अंतिम विकल्प है। -- राधाकृष्ण यादव, उप निदेशक, कृषि, शाहजहांपुर।
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