शाहजहांपुर। हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अखिलेश कुमार पाठक ने पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
शासकीय अधिवक्ता मनोज मिश्रा और अतुल अग्निहोत्री ने बताया कि सिंधौली थाना क्षेत्र के गांव तेरा की रहने वालीं चमेली देवी ने आठ जनवरी 2018 को थाने में तहरीर दी थी कि सात महीने पहले उनके पति ने गांव के रहने वाले शराफत के बेटे आबिद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आबिद जेल चला गया था। इसी रंजिश में आठ जनवरी को आबिद, शराफत तथा शराफत के बड़े बेटे ने खेत में लाठी-डंडे और धारदार हथियार से उसके पति रामपाल की हत्या कर दी। उसकी बेटी ने हमलावरों को भागते देखा था। पुलिस ने विवेचना के बाद आबिद और शराफत के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, आईपीसी की धारा 302 में चार्जशीट अदालत में पेश की। अदालत में गवाहों के बयान हुए और साक्ष्य पेश किए गए। अभियुक्तों की ओर से वकील ने तर्क दिया कि उन लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। 80 वर्षीय शराफत कैंसर का मरीज है। कम से कम सजा दी जाए। न्यायालय ने शासकीय अधिवक्ताओं के तर्कों से सहमत होते हुए आबिद उर्फ आमिर और शराफत को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।