उसने मकान के दरवाजे और खिड़की तक तोड़कर बेच दिए। सोमवार सुबह से रुपयों के लिए हर्षवर्धन हंगामा कर रहा था। शाम को बात काफी ज्यादा बढ़ गई। बताते हैं कि वह बेल्चे से मकान को तोड़ने लगा।
ओमकार व कलावती ने मना किया तो बेल्चे के साथ वहां पड़ी हथौड़ी लेकर हमलावर हो गया। माता-पिता को दौड़ा लिया। परेशान होकर ओमकार लाइसेंसी बंदूक निकाल लाए। बंदूक को देखकर हर्षवर्धन भी भिड़ गया। इस बीच चली गोली सीने में लगने से हर्षवर्धन की मौत हो गई। बताते हैं कि इससे पहले भी दो बार हर्षवर्धन अपने पिता के सिर पर हमला कर चुका था, जिससे उन्हें काफी चोट आई थी।
परिजन के नहीं थम रहे आंसू
हर्षवर्धन की मौत से कलावती के आंसू नहीं थम रहे हैं। उनके ऊपर दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा है। बेटे के जान से जाने के साथ ही पति भी जेल जाएंगे। वारदात की सूचना पर बेटी शिल्पी भी आ गई। उसने परिजन को किसी तरह संभालने का प्रयास किया।
एसपी देहात दीक्षा भांवरे अरुण ने बताया कि हर्षवर्धन आए दिन परिजनों से झगड़ा करता था। उसने हथौड़ी से परिजनों पर हमला करने की कोशिश की। झीनाझपटी में चली गोली लगने से उसकी मौत हुई है।