यह था पूरा घटनाक्रम
मामले की शुरुआत 13 मार्च को हुई थी। एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी परीक्षा देकर लौटते समय दीपक उर्फ टाइमपास के साथ चली गई। दीपक के भाई संजय को पुलिस ने हिरासत में लिया तो दीपक खुद पुलिस के सामने आ गया था। दीपक करीब पांच महीने जेल में रहा और 20 अगस्त को जमानत पर बाहर आया।
परिजनों के अनुसार, कुछ दिन बाद किशोरी अचानक दीपक के घर पहुंच गई। परिवार ने इसकी सूचना उसके परिजनों को दी। इसके बाद लड़की के परिजन पुलिस को लेकर वहां पहुंचे और दोनों को थाने ले गए। पांच अक्तूबर की रात करीब 8:30 बजे किशोरी को शादी की नीयत से बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाते हुए दोबारा तहरीर दी गई।
इस बार दीपक के साथ उसकी मां गीता व परिवार के रामदास और ढाकन को भी नामजद किया गया। आरोप लगाया कि शिकायत का विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने छह अक्तूबर को दीपक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
गमछे से फंदा लगाने की आशंका, हाथ-गर्दन पर कट के निशान
शुक्रवार सुबह करीब 11:26 बजे दीपक को अन्य बंदियों के साथ कचहरी में पेशी के लिए भेजा गया था। जेल अधीक्षक जेपी तिवारी के अनुसार, दीपक समेत 70 बंदियों को कचहरी भेजा गया था। उसके पास गमछा था, जिसका इस्तेमाल बंदीगृह में फंदा लगाने में किए जाने की बात सामने आई है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके हाथ और गर्दन पर कट के निशान भी मिले हैं। इससे आशंका है कि फंदा लगाने से पहले उसने किसी धारदार वस्तु से खुद को चोट पहुंचाई थी। पुलिस घटना से पहले की परिस्थितियों और बंदीगृह में निगरानी व्यवस्था की जांच कर रही है। करीब ढाई घंटे तक बंदीगृह के अंदर जांच की गई और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए।
बंदीगृह के बाहर हुआ हंगामा
दीपक की मौत की सूचना के बाद बंदीगृह के बाहर परिजनों की भीड़ जुट गई। इसी दौरान रोजा क्षेत्र का एक दंपती अपने पाक्सो एक्ट के आरोपी बेटे की जानकारी लेने पहुंचा। नाम की पुष्टि न होने पर परिजनों और पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक हो गई। बाद में बेटे के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने राहत की सांस ली।
बार एसोसिएशन ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सेंट्रल बार एसोसिएशन के महासचिव राजेश कुमार अवस्थी ने बंदीगृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बंदीगृह के बाहर पर्याप्त पुलिस बल होने के बावजूद अंदर निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने अंदर कम से कम दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने, घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि बंदी के पिता की तहरीर पर सदर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।