शाहजहांपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में शनिवार को प्रशिक्षण के समापन पर प्रमाण पत्रों के साथ खड़े ?
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। समापन सत्र में वक्ताओं ने प्रतिभागी किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रयोग कर उनसे अतिरिक्त लाभ कमाने के उपाय समझाए। इस मौके पर प्रशिक्षित किसानों को उपयोगी कृषि साहित्य और प्रमाण पत्र वितरित किए।
इस दौरान कृभको के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन आज के संदर्भ में जरूरी है। धान की कटाई के बाद पराली को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण और मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है। इससे बीज के अंकुरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए विभिन्न यंत्रों द्वारा फसल अवशेष उसी जगह पर मिट्टी में मिला कर जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ाई जा सकती है और इससे पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होगा। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ एनसी त्रिपाठी ने बताया कि सरकार फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित मशीन पर 50 से 80 प्रतिशत तक छूट दे रही है।
उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी अधिक से अधिक लोगों को देने के लिए प्रेरित किया। प्रसार वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र प्रसाद, गन्ना शोध परिषद के पूर्व वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. एसके सिंह और परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को फसल अवशेष प्रबंधन के विभिन्न यंत्रों की जानकारी दी। केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. सीपी गुप्ता ने इस दिशा में किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। केंद्र की वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. नूतन वर्मा ने फसलों में लगने वाले कीड़े एवं बीमारियों के नियंत्रण पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण में विभिन्न गांवों के तमाम किसानों ने भाग लिया।