आम बजट में किसानों के हितों में की गई घोषणाओं को किसान यूनियनों ने आंकड़ों की बाजीगरी बताया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू टिकैत गुट) और भाकियू भानू गुट नेताओं को खेती-किसानी के लिहाज से निराशा हुई है।
भाकियू टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि आंकड़ों की बाजीगरी से बजट को अच्छा दिखाने का प्रयास हुआ है। इस बजट में किसानों के लिए 36 हजार करोड़ रुपये की घोषणा की गयी है, लेकिन असलियत में कृषि क्षेत्र को केवल चार हजार करोड़ का आवंटन किया गया है। सबसे अव्वल तो फसल बीमा योजना के लिए जो 5500 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिससे बीमा कंपनियों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई के लिए हुआ आवंटन पर्याप्त नहीं है। आकस्मिक सिंचाई, वाटर सैट, भूगर्भ जल रिचार्ज हेतु कम से कम एक लाख करोड़ आवंटन किए जाने की आवश्यकता थी, लेकिन नहीं किया गया।
भाकियू टिकैत गुट के जिला इकाई के महासचिव राशिराम वर्मा ने कहा कि किसान आत्महत्या कर रहा है, लेकिन सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। किसान आय आयोग का गठन भी न करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शाहजहांपुर, प्रदेश और देश में 83 फीसदी किसानों की आय ऋणात्मक है और किसान की आय को बढ़ाने के तरीके व अन्य दूसरे विकल्पों पर विचार कर किसानों की आय सुनिश्चित किए जाने पर प्रभावी कदम उठाये जाते। आपदा राहत नीति स्पष्ट नहीं है।
न गुजारे लायक छोड़ा, न मरने लायक
शाहजहांपुर। भाकियू भानु गुट के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव ने केंद्रीय बजट को किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान बताया है। कहा कि इस बजट में जो व्यवस्था दी गई है, उसने न तो गुजारे लायक छोड़ा और ना ही मरने लायक। सीधे तौर पर कहें तो आंकड़ों की बाजीगरी में किसानों के पेट में छुरा ही घोंपने जैसा काम हुआ है।