फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिस्टम की ढिलाई: किसानों के फसली नुकसान की नहीं हो रही भरपाई

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। प्राकृतिक आपदा से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से चलाई गई फसल बीमा योजना किसानों के लिए बेमानी साबित हो रही है। सिस्टम की ढिलाई की वजह से सालाना करोड़ों रुपये बीमा किस्त जमा करने के बाद भी योजना का लाभ किसानों को न मिलकर बीमा कंपनियों को मिल रहा है, जबकि किसान प्रीमियम जमा करने के बाद भी खुद को ठगा महसूस कर रहा है।
विज्ञापन

गत रबी सीजन में फसलों का 50 फीसदी रकबा बीमा योजना से आच्छादित किए जाने का लक्ष्य तय किया गया था। जिले के 4.09 लाख किसानों ने इस वर्ष 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई की है। बैंकों एवं किसान सहकारी समितियों के लगभग 1.75 लाख ऋणी किसानों की फसलें पहले से ही बीमित हैं, लेकिन बीमा कंपनी के सर्वेयरों की लापरवाही और उनके स्तर से नुकसान का आकलन कम किए जाने से गत वर्ष खरीफ सीजन से लेकर अभी तक तीन फसली सीजन में बीमा योजना का लाभ सिर्फ 547 किसानों को मिल सका, जबकि 59694 किसानों के 915.54 लाख रुपये प्रीमियम से बीमा कंपनियां मालामाल हो चुकी हैं।
बीमित फसलों का वित्तीय मान (रुपये प्रति हेक्टेयर) एवं प्रीमियम
----------------------------------------
फसल वित्तीय मान प्रीमियम
गेहूं 47000-50000 705
आलू 102000-112000 5600
धान 53000-58000 1160
मक्का 33000-38000 760
मसूर उड़द, मूंग 28000-30000 600
मूंगफली 50000-52000 1040
चना-मटर 29000-30000 450
राई-सरसों 31000-33000 465
किसानों की बात
बीमा योजना किसानों से लूट का साधन बन गई है। बारिश से आलू और गेहूं को काफी नुकसान हुआ, लेकिन बीमा कंपनी के सेटेलाइट और सर्वेयर को फसली क्षति नहीं दिख रही है। बैंक वाले किसानों के खाते से प्रीमियम कटौती के नाम पर रकम की जबरन उगाही कर रहे हैं, लेकिन सर्वे मेें नुकसान का वास्तविक ब्योरा दर्ज नहीं किया जा रहा। - अजीत सिंह, चक ममरेज (कांट)
विज्ञापन

बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या फिर बेमौसम की बरसात से किसानों को जितना नुकसान होता है, उसकी तुलना में बीमा कंपनियां एक तिहाई भुगतान भी नहीं करतीं। भुगतान में भी लेखपाल और बीमा कंपनी वाले मनमानी करते हैं। आवारा जानवरों से फसलों को काफी नुकसान हो रहा है, लेकिन बीमा कंपनियां इसे कवर नहीं कर रहीं हैं। - श्याम किशोर अग्निहोत्री, कोना याकूबपुर (जलालाबाद)
अधिकारियों की बात
गैर ऋणी किसानों को बीमा कवर देने को गत वर्ष खरीफ सीजन में लगभग 60 हजार किसानों का सर्वे कराकर उनसेे संपर्क किया गया, लेकिन मुश्किल से दस फीसदी किसानों ने प्रीमियम जमा करके स्वैच्छिक बीमा कराया। कर्ज माफी योजना का लाभ लेने को किसान जागरूक हैं, लेकिन गैर ऋणी किसान प्रीमियम जमा करने से बचने के लिए फसलों का बीमा कराने में दिलचस्पी नहीं लेते। प्रमुख सचिव के नवीनतम शासनादेश के अनुरूप कृषि विभाग के प्रसार अनुभाग द्वारा किसानों के बीच हर फसली सीजन में बुवाई के बाद सर्वे कराया जाता है। - डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
गैर ऋणी किसानों को बीमा लाभ अर्जित करने के लिए प्रीमियम जमा करने को लगातार जागरूक किया जा रहा है। गत वर्ष रबी सीजन में व्यापक सर्वे करने पर भी बमुश्किल से 20 फीसदी गैर ऋणी किसानों ने प्रीमियम जमा किया। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में हुई बारिश के बाद किसानों से आलू के नुकसान से संबंधित 50 शिकायतें मिली हैं, जिनका ब्लॉक स्तर पर लेखपालों के माध्यम से भी सत्यापन कराने पर पता चला कि इनमें से अधिकांश किसानों की फसलें बीमित नहीं हैं। - आशीष अवस्थी, क्षेत्रीय अधिकारी, यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इश्योरेंस कंपनी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें