शासन के निर्देश पर प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारी तीन दिन तक हुई बेमौसम बारिश के कहर से हुई फसलों की बरबादी का आंकलन कराने में जुट गए हैं। राजस्व विभाग के अफसरों ने तहसील दिवस के बाद लेखपालों को गांवों की ओर रवाना कर दिया है। कृषि विभाग ने फसली नुकसान केसर्वे के लिए ब्लॉक स्तर पर एडीओ कृषि और कृषि रक्षा सहायकों की टीमें गठित कर दी हैं। सर्वे की आरंभिक रिपोर्टों में अगैती गेहूं और आलू समेत दलहनी-तिलहनों को काफी नुकसान की पुष्टि भी हुई है। उधर, फसली क्षति की तुलना में कम मुआवजे की घोषणा से किसान खासे परेशान हैं, क्योंकि उन्हें अपनी लागत डूबती नजर आ रही है।
इस बार 2.55 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई। यह रकबा पिछले रबी सीजन की तुलना में करीब 40 हजार हेक्टेयर अधिक है। चूंकि, गत वर्ष इन्हीं दिनों नए आलू की आवक शुरू होने के बावजूद थोक रेट ज्यादा रहे। इसलिए इस बार भरपूर मुनाफा पाने के लिए किसानों ने आलू का रकबा भी बढ़ा दिया। जिला उद्यान अधिकारी आरएन वर्मा के अनुसार इस वर्ष 10500 हेक्टेयर में आलू बोया गया जो कि पिछले साल की तुलना में करीब दो हजार हेक्टेयर अधिक है।
बारिश ने गेहूं और आलू उत्पादकों के सारे अरमान धोकर रख दिए। किसानों के अनुसार प्रति एकड़ गेहूं पर लगभग 25 हजार और आलू पर 75 हजार की लागत आती है। पहले बोए गए 40 फीसदी अगैती गेहूं की बालियां पानी के वजन से खेतों में पसर गई हैं। इसी तरह अभी तक खेतों से निकल नहीं सका 25 फीसदी आलू भी सड़ने के कगार पर है। ऐसी स्थिति में किसानों को मुआवजा से भी लागत नहीं निकल पाने की चिंता सता रही है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार अभी फसली क्षति के मुआवजा भुगतान की शासन से गाइड लाइन नहीं मिली है।
एक एकड़ खेती पर आने वाली लागत: एक नजर
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खर्च की मदें गेहूं आलू
ठेका एक एकड़ छमाही 12000.00 12000.00
खेत की जुताई 1500.00 1500.00
बुवाई पर लागत 700.00 3000.00
बीज की खरीद 1200.00 25000.00
खाद बुवाई के साथ 900.00 7000.00
खाद बुवाई केबाद 2000.00 10000.00
खरपतवारनाशक 1500.00 3000.00
सिंचाई 2000.00 5000.00
कटाई 1000.00 6000.00
मजदूरी खर्च 1500.00 3000.00
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कुल लागत 24300.00 75500.00
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होली पर खून के आंसू रो रहे किसान
पुवायां। मिनी पंजाब कहे जाने वाले पुवायां तहसील क्षेत्र के किसान इस बार होली पर खून के आंसू बहाने को मजबूर हो गए हैं। दरअसल, यहां के किसानों, खासकर बड़े फॉर्मरों ने गेहूं की बुवाई काफी जल्दी कर दी थी। नतीजा यह हुआ कि जब बालियां निकलीं तो बारिश में सारी पौध खेतों में बिछ गई। यही हाल आलू का हुआ। दोनों फसलें चौपट होने से किसानों की त्योहार से जुड़ी खुशियां काफूर हो गई हैं। गत वर्ष आलू का बहुत बढ़िया रेट मिलने के कारण इस बार आलू बीज 18 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल बिका। खेतों में पानी भर जाने से आलू सड़ने लगा है। ऐसे में किसान आलू को कम रेट में बेच रहे हैं, लेकिन थोक भाव बढ़कर 150 रुपये क्विंटल हो गया है।
जलालाबाद। आलू का सही रेट न मिल पाने से परेशान किसानों को बेमौसमी बरसात ने रोने पर मजबूर दिया है। क्षेत्र में 20 से 25 प्रतिशत गेहूं पूरी तरह खेत में बिछ गया। बालियों वाली गेहूं फसल की जड़ उखड़ जाने से उसमें पड़ा दाना सूख जाएगा। जिन काश्तकारों ने अभी आलू की खुदाई नहीं की, उनकी फसल सड़ जाने की आशंका है। यही नहीं, बरसात से सरसों, मटर, मसूर आदि फसलों को भी नुकसान तय है। एसडीएम जंगबहादुर यादव ने कहा कि सर्वे पूरा होने के बाद ही नुकसान की सही तस्वीर सामने आ सकेगी।
तिलहर में 25 फीसदी फसलें हो गईं बरबाद
तिलहर। बारिश और तेज हवाओं से क्षेत्र में गेहूं और आलू की करीब 25 फीसदी फसल चौपट होने केआसार हैं। इससे किसान की होली की खुशियां मनाने के बजाय नुकसान के गम में डूब गए हैं। व्यापारी भी मौसम के बदले रुख से सहमे हैं क्योंकि बाजार में किसानों की आवक कम होने से उनका लाखों का व्यवसाय प्रभावित होने लगा है। तहसीलदार लालता प्रसाद तिवारी के अनुसार फौरी आकलन से क्षेत्र में 20 से 25 प्रतिशत तक फसल के नुकसान का अनुमान है। उन्होंने बताया कि शासन की व्यवस्था के अनुसार छोटे, मझोले किसानों को ही मुआवजा देने का प्रावधान है। नुकसान के पूरे आकलन के बाद शासन को आख्या भेजी जाएगी ताकि किसानों को उचित क्षतिपूर्ति कराई जा सके।