अपने खेत पर मचान बनाकर फसल की रखवाली करता बझेड़ा भगवानपुर गांव निवासी सुनील। संवाद
- फोटो : mathura
शाहजहांपुर। मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी पूस की रात की तरह जिले में भी इस वक्त लाखों हल्कू छुट्टा पशुओं से अपनी फसल बचाने के लिए हाड़कंपाती ठंड में खेतों में रात गुजार रहे हैं। उनकी आंखों में नींद आई नहीं कि छुट्टा पशु महीनों की मेहनत से उपजी फसल चट करने में देर नहीं लगाते।
प्रशासन गोवंशीय पशुओं को संरक्षित करने के लिए अभियान चलाने की बात कह रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत बिलकुल अलग है। छुट्टा पशु सड़कों और खेतों पर घूम रहे हैं। इस समय गेहूं-सरसों, आलू की फसल खेतों में लहलहा रही है। दिनभर झुंड बनाकर गोवंशीय पशु गांव के आसपास बैठे रहते हैं।
शाम ढलते ही वे खेतों में घुसने लगते हैं। ऐसे में किसान इस भीषण ठंड में भी खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुकते हैं। साथ ही छुट्टा पशु से किसानों को अपनी जान की भी रखवाली करनी होती है। कई बार भगाने के दौरान पशु उन पर ही हमला कर देते हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन की टीम कभी पशुओं को पकड़ने नहीं आती।
अपने खेत पर मचान बनाकर फसल की रखवाली करता बझेड़ा भगवानपुर गांव निवासी सुनील। संवाद- फोटो : mathura