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किसानों पर डीएपी संकट की मुसीबत छाई, सरकारी दावे हुए हवा हवाई

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शाहजहांपुर। पहले सूखा और फिर बाढ़ से फसलों की तबाही झेलने के बाद अब रबी सीजन में गेहूं की बुआई के साथ ही किसानों को डीएपी संकट से जूझना पड़ रहा है। हालांकि, कृषि विभाग डीएपी का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है लेकिन सहकारी समितियों पर डीएपी निल बताई जा रही है। फुटकर उर्वरक विक्रेताओं ने भी स्टॉक छिपाकर डीएपी की कालाबाजारी शुरू कर दी है।
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जिले में उर्वरकों के 25 थोक और 1030 फुटकर विक्रेता हैं। इसके अलावा कृषि विभाग के 942 उर्वरक बिक्री केंद्र हैं। जिले में 115 किसान सहकारी सहकारी समितियां हैं। समितियों के स्तर से करीब 7200 टन डीएपी का वितरण होने के बाद वहां स्टॉक खत्म होते ही बाजार में भी डीएपी का संकट गहराने लगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अक्टूबर में डीएपी वितरण के मासिक लक्ष्य 11800 टन के सापेक्ष 15481 टन डीएपी उपलब्ध रही और उसमें 12387 टन वितरण के बाद 3094 टन डीएपी शेष बची जो बाजार में उपलब्ध है। नई रैक भी आने वाली है।
बावजूद बाजार में डीएपी के कृत्रिम अभाव के कारणों की जांच के लिए फुटकर उर्वरक प्रतिष्ठानों पर स्टॉक निरीक्षण अभी तक नहीं किया गया। अधिकारियों की लापरवाही के चलते विक्रेता मनमानी पर उतारू हैं। मिर्जापुर क्षेत्र में कुछ खाद विक्रेता इफको का डीएपी बैग 1500 रुपये में बेच रहे हैं, जबकि उसका मूल्य 1350 रुपये नियत है। कई उर्वरक विक्रेताओं को समितियों से मिलने वाली इफको डीएपी और यूरिया खाद बेचने का लाइसेंस प्राप्त है। ऐसे विक्रेताओं ने सहकारिता डिपो से प्राप्त डीएपी का स्टॉक कागजों में निल करके उसका भंडारण कर लिया है।
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खुटार और बंडा में इफको केंद्रों पर डीएपी गायब, किसान परेशान
पुवायां। किसानों ने गेहूं और आलू की बुआई के लिए खेत तैयार कर लिए हैं, लेकिन डीएपी नहीं मिलने से परेशान कुछ किसान यूरिया, पोटाश आदि मिलाकर काम चला रहे हैं। तमाम किसान इस उम्मीद से बुआई नहीं कर रहे हैं कि जल्द डीएपी उपलब्ध हो जाएगी। क्षेत्र में इफको के बिक्री केंद्रों समेत कई समितियों पर भी डीएपी उपलब्ध नहीं है। देवकली की समिति पर सचिव नहीं मिले। यहां चौकीदार रवि ने बताया कि डीएपी और एनपीके उपलब्ध नहीं है। इफको केंद्र बंडा के प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि डीएपी उपलब्ध होने पर सोमवार को वितरित की जाएगी।
जैतीपुर में महंगी डीएपी खरीदने को किसान मजबूर
जैतीपुर। क्षेत्र में किसी भी समिति पर खाद नहीं होने का दुकानदार सीधा लाभ उठा रहे हैं। किसान महंगी खाद खरीदने पर भी खामोश हैं क्योंकि उन्हें आगे भी खाद की जरूरत पड़ेगी। इसलिए दुकानदारों की हर शर्त मानने को मजबूर हैं। कोई दुकानदार खाद के साथ बीज, सल्फर या नैनो यूरिया दे रहा है तो कोई इन चीजों के बगैर डीएपी बैग 1700 रुपये तक बेच रहा है।
पांच एकड़ खेत गेहूं की बुवाई के लिए पूरी तरह से तैयार है, लेकिन डीएपी नहीं मिल रही है। इस कारण बुवाई पिछड़ रही है। इसका प्रभाव उपज पर भी पड़ेगा। - सरोज वर्मा, पटनी, बंडा
चार एकड़ गेहूं बोने थे। डीएपी के लिए कई दिन दौड़ लगानी पड़ी, लेकिन फिर भी खाद नहीं मिल सकी। मजबूरन 15 सौ रुपये प्रति बोरी डीएपी खरीद कर गेहूं बोना पड़ा। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। - कृष्णगोपाल मिश्रा, धर्मापुर, बंडा
इस वर्ष 2500 टन की केवल एक रैक मिल सकी, जबकि बुआई जल्दी शुरू हो जाने से मांग बढ़ गई है। समितियों के माध्यम से पिछले स्टॉक को मिलाकर सात हजार टन से ज्यादा डीएपी बांटी जा चुकी है। डीएपी की 2541 टन की नई रैक गुजरात से देर रात अथवा सोमवार सुबह तक रेलवे साइडिंग पर पहुंचने की उम्मीद है।-प्रवीण कुमार, सहायक निबंधक (सहकारी समितियां)
डीएपी संकट दूर कराने के लिए विधायक ने लिखा पत्र
जिले में गेहूं की बुआई के दौरान डीएपी के लिए भटक रहे किसानों की समस्या दूर कराने को विधायक हरिप्रकाश वर्मा ने डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने डीएम को दिए पत्र में कहा है कि डीएपी की ओवररेटिंग (कालाबाजारी) की किसानों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए ऐसा करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई कर जनपद मेें डीएपी जल्द मंगवाएं। विधायक ने बताया कि उन्होंने इस बारे मेें कृषि मंत्री को भी पत्र भेजा है। संवाद
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