पुवायां/तिलहर। दिल्ली की सीमाओं पर जमे किसानों का आंदोलन समाप्त हो चुका है। एक साल से अधिक समय तक चले आंदोलन में पुवायां के किसानों की बड़ी भूमिका रही। किसानों को कृषि कानूनों के नुकसान बताकर उनको जागरूक करते रहे और गाजीपुर बार्डर ले जाते रहे।
आंदोलन के दौरान भाकियू टिकैत गुट के अध्यक्ष नरेश टिकैत, प्रवक्ता राकेश टिकैत, भाकियू चढूनी गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी भी पुवायां, बंडा आए और किसानों को आंदोलन के प्रति जागरूक किया। किसान नेताओं ने अपने अनुभव साझा किए हैं। कहा कि किसानों का एकजुट होना बड़ी जीत है।
केंद्र सरकार ने किसानों की व्यथा समझी और कृषि कानून वापस किए हैं, इसके लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद। हालांकि यह फैसला सरकार को काफी पहले ही ले लेना चाहिए था। आंदोलन ने विभिन्न जाति, धर्मों में बंटे किसानों को एकजुट करने का काम किया है।
- मंजीत सिंह धालीवाल, अध्यक्ष भाकियू टिकैत शाहजहांपुर
किसान संगठन कृषि कानून बनने के बाद से ही इन्हें गलत बताते हुए मुखालफत कर रहे थे। ये लागू होते तो किसानों की जमीनें पूंजीपतियों के पास बंधक हो जाती। यह आंदोलन किसानों के अस्तित्व की लड़ाई थी। आंदोलन से सबक मिला है कि संगठित होकर हक हासिल किया जा सकता है।
तरविंदर सिंह मोमी, जिलाध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ भाकियू चढ़ूनी गुट शाहजहांपुर
किसान आंदोलन से सीख मिली है कि हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटना चाहिए। यह पूरे देश के किसानों की सफलता है। उनमें खुशी है। जो लोग किसान आंदोलन में शामिल रहे और प्रत्यक्ष या परोक्ष सहयोग दिया, उन सबको कृषि बिल वापस होने का बहुत बहुत धन्यवाद।
अनिल सिंह यादव, तहसील अध्यक्ष भाकियू टिकैत गुट पुवायां
पराली जलाने पर किसानों का उत्पीड़न होता था, उससे मुक्ति मिल गई है। आंदोलन की सफलता से यह भी सिद्ध हो गया है कि अब किसान अपने उत्पीड़न के खिलाफ पूरी तरह से विरोध कर जीत हासिल करेगा। किसान एकजुट हुआ है, यह भी आंदोलन की बड़ी सफलता है।
करमजीत सिंह, उपाध्यक्ष तराई क्षेत्र भाकिमयू राष्ट्रवादी उत्तर प्रदेश
काले कृषि कानून वापस होने के बाद किसान आंदोलन समाप्त होना खुशी की बात है। सरकार ने चुनाव के कारण कानून वापस लिए हैं, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। अब विपक्ष पर कोई मुद्दा नहीं रहा। सरकार एमएसपी पर गारंटी कानून बनाकर किसानों को राहत प्रदान करे।
पुष्पराज सिंह यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर यूनियन।
सरकार को देर सबेर सुध आई, यह खुशी की बात है। आंदोलन समाप्त होने का श्रेय 715 शहीद हुए किसानों को जाता है। राजनीतिक लाभ लेने के लिए सरकार ने कानून वापस लिए, लेकिन चुनाव में इसका लाभ मिलने वाला नहीं है। किसानों ने आंदोलन वापस नहीं लिया, बल्कि स्थगित किया है।
- आदित्य प्रताप सिंह, जिला प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट।
आदित्य प्रताप सिंह- फोटो : SHAHJAHANPUR
पुष्पराज सिंह यादव- फोटो : SHAHJAHANPUR
करमजीत सिंह, उपाध्यक्ष तराई क्षेत्र भाकिमयू राष्ट्रवादी उत्तर प्रदेश- फोटो : POWAYAN
मंजीत सिंह धालीवाल, अध्यक्ष भाकियू टिकैत शाहजहांपुर- फोटो : POWAYAN
तरविंदर सिंह मोमी, जिलाध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ भाकियू चढ़ूनी गुट शाहजहांपुर- फोटो : POWAYAN