औद्योगिक अस्थान की एक फैक्ट्री के हस्तांतरण मामले में विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के छह माह बाद भी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है। इस मामले में जिला उद्योग केंद्र की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पीड़ित ने डीएम को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि जिला उद्योग केंद्र अब किसी तीसरे के नाम फैक्ट्री को बेचना चाह रहा है, इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
रोजा के औद्योगिक अस्थान की फैक्ट्री संख्या ए-13 सोहन सिंह के नाम आवंटित थी। सरदार त्रिलोचन सिंह का आरोप है कि उनके पिता सोहन सिंह का निधन 1994 में हो गया। त्रिलोचन सिंह ने फैक्ट्री को अपने नाम आवंटित करने की बात कही, लेकिन जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने विपक्षियों से मिलकर फर्जी वारिसान के आधार पर सन 2011 में उस फैक्ट्री को चंद्रावती और ऋषिकेश पाल निवासी नागरपाल के नाम स्थानांतरित कर दी जो स्पिक एशिया घोटाले के मास्टर माइंड राम सुमिरन पाल के मां और रिश्तेदार हैं। इस हस्तांतरण में विभाग के एक बाबू की भूमिका है जो आरोपियों का करीबी बताया जा रहा है।
त्रिलोचन सिंह ने इस मामले में संयुक्त निदेशक उद्योग को भी शिकायतें भेजी थीं। इसकी हुई जांच में वारिसान प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। जिला उद्योग केंद्र के पत्र संख्या 1642 दिनंाकित 22 अक्तूबर 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र ने पारित किए हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश के छह माह बीत गए हैं, लेकिन इस मामले में 21 अप्रैल 2015 तक आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है। आहत त्रिलोचन सिंह ने एक बार फिर फैक्ट्री के फर्जी रूप से हस्तांतरण का सच बयां करते हुए डीएम से कार्रवाई की मांग की है।
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त आर. चंद्रा से जब रोजा औद्योगिक आस्थान की इस फैक्ट्री के संबंध में जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि वह रोमिंग जोन में हैं। लिहाजा बात नहीं कर सकते और फोन काट दिया ।