- शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत लॉटरी से निकले बच्चों के नाम
- ऑर्डर लेकर पहुंचे बच्चों को लौटा रहे स्कूल, फंसा रहे कई तरह के पेंच
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश को लेकर अड़चन आना शुरू हो गई है। शासन से विद्यालयों के खातों में पिछले सत्र का एक करोड़ 70 लाख रुपया ट्रांसफर किया जा चुका है, बावजूद इसके स्कूल में प्रवेश कराने के लिए अभिभावक बीएसए का ऑर्डर लेकर चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
जिले में आरटीई के तहत दूसरे चक्र में निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए 844 बच्चों ने आवेदन किया था। इसमें 476 का चयन होने पर उनके ऑर्डर बनाकर वितरण का कार्य किया जा रहा है, जबकि पूर्व में शासन ने वर्ष 2021-22 व 2022-23 की निजी स्कूलों की फीस एक करोड़ 70 लाख 10 हजार 810 रुपये ट्रांसफर कर दिए थे।
छात्र नामांकन के अनुसार, प्रत्येक छात्र के 450 रुपये माह के हिसाब से रुपये भेजे गए थे। पिछले सत्र का रुपया मिलने के बाद भी इस सत्र में प्रवेश के लिए लॉटरी से चयनित छात्र-छात्राओं को चक्कर लगवाए जा रहे हैं। अधिकतर स्कूलों में कक्षा में प्रवेश को लेकर उम्र का पेंच फंस रहा है। वार्ड के बाहर का छात्र होने की बात कहकर उन्हें लौटाया जा रहा। इसी तरह कुछ ऐसे कागज मांगे जा रहे हैं, जो जल्द बनना संभव नहीं है, जिसके चलते बच्चे व अभिभावक बीएसए व रोटी गोदाम स्थित नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
अधिकतर स्कूलों में आरटीई का रुपया नहीं आया है। कोई स्कूल अभिभावकों को लौटा नहीं रहा है। सिर्फ प्रवेश के लिए जरूरी कागजात मंगाए जा रहे हैं। - रचित अग्रवाल, अध्यक्ष-सहोदया
स्कूलों से आरटीई के तहत प्रवेश के नामों की सूची मांगी गई थी, जो स्कूल प्रवेश नहीं ले रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- कुमार गौरव, बीएसए