ब्लड ग्रुप की गलत रिपोर्ट और बाद में मरीज की मौत पर परिवारजनों द्वारा शव रखकर किए गए प्रदर्शन के बाद मुख्य चिकित्साधीक्षक और ब्लड बैंक प्रभारी पर दर्ज गैर इरादतन हत्या के एफआईआर से नाराज जिला संयुक्त चिकित्सालय के सभी अधिकारी, कर्मचारी और स्टाफ ने शुक्रवार सुबह आपात बैठक की। एकस्वर में दर्ज एफआईआर को गलत बताते हुए उसकी निंदा की गई। तय हुआ कि एफआईआर निरस्त न होने की सूरत में 19 से अस्पताल के सभी अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे और उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। बाद में चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम और एसपी से मिलकर अपनी मांग संबंधी ज्ञापन सौंपा।
बता दें कि जिला अस्पताल के सामने बृहस्पतिवार की सुबह अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतक का शव रखकर जाम लगा दिया। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने गलत ब्लड बताया जिसकी वजह से मरीज की जान चली गई। करीब दो घंटे तक अस्पताल गेट पर जमकर हंगामा हुआ। मामले में सीएसएस और ब्लड बैंक प्रभारी के खिलाफ गैरइरादतन का हत्या का मुकदमा दर्ज होने एवं एसडीएम और सीओ सिटी के आश्वासन के बाद जाम खोला गया। इस एफआईआर पर नाराज अस्पताल स्टाफ की बैठक शुक्रवार को प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के बैनर तले हुई। अधिकारी एवं कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से अध्यक्ष डा. वाईपी गौतम, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के शाहजहांपुर इकाई के सचिव डा. ओपी गौतम के अलावा इस बैठक में डा. एपी आर्या, सीएमएस डॉ. केशव स्वामी, डॉ. एमपी गंगवार, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. एयूपी सिन्हा, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. केपी सिंह, डॉ. केसी वर्मा, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. किरन गुप्ता, डॉ. अलका पांडेय, डॉ. संध्या पाठक, डॉ. केके वर्मा, डॉ. एमएल अग्रवाल, डॉ.राहुल यादव, जेडी बंसल, अनूप मिश्रा, जयपाल सिंह, ओएस कनौजिया, नसीम अहमद, सिद्धार्थ अग्निहोत्री, सुषमा गुप्ता, मोहम्मद अली, अकील अहमद, मंसूर अली, मेट्रन लाजवंती, लोरीना, सिस्टर साजमा, रुथ कौशल, राम तारा, अनीता गुप्ता, पवन कुमारी, ऊषा मिश्रा, माग्रेट तोमर, पूनम पाल, सुमन मिल्टन, सत्यमा सिंह, मीरा, रेनू देवी, अनुपमा, रोजबीना दास, सपना परमार, निर्मला देवी, गलैडिस,मुन्ना लाल वर्मा, संतोष शर्मा आदि मौजूद थे।
जिला अस्पताल के चिकित्सक एफआईआर निरस्त कराने की मांग लेकर मिले थे। उन्हें स्पष्ट कर दिया गया था कि एफआईआर को निरस्त नहीं कराया जा सकता। केस दर्ज हुआ है और उसकी विवेचना की जा रही है। यह कानूनी प्रक्रिया है। जांच अधिकारी तथ्यों के आधार पर चार्जशीट पेश करेगा या फाइनल रिपोर्ट लगाएगा। मृतक के परिवारजनों के सेंटीमेंट का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। हालांकि यह बात सही है कि अस्पताल में हुए समुचित इलाज के चलते ही 80 फीसदी झुलसा मरीज इतने लंबे समय तक जीवित रह सका।
- पुष्पा सिंह, डीएम शाहजहांपुर