शाहजहांपुर। गांवों में तालाब ग्रामीण जनजीवन की दैनिक जरूरतों का कभी हिस्सा रहे हैं। लेकिन आबादी बढ़ने के साथ रिहायशी क्षेत्र बढ़े, तो लोगों मेें इन्हीं तालाबों को आशियाना बनाने की होड़ लग गई। सिस्टम की ढिलाई कहें या फिर अधिकारियों की संवेदनहीनता, जिसके चलते जलालाबाद में पौराणिक महत्व के रामताल पर अवैध कब्जे कर पक्के मकान बना लिए जाने से न सिर्फ उसका आकार सिकुड़ रहा है, लोगों की आस्था भी आहत हो रही हैं। भगवान परशुराम की जन्मस्थली जलालाबाद मेें उनकी जीवन कथा से जुड़े राम ताल पर कब्जों को लेकर संबंधितों को नोटिस जारी हो चुके हैं।
परशुराम के फरसा से राम ताल का पानी हुआ लाल
जलालाबाद। नगर के मोहल्ला खेड़ा में श्री परशुराम मंदिर के पास स्थित रामताल के बारे में मान्यता है कि आसुरी शक्तियों का संहार करने के बाद भगवान परशुराम ने अपना रक्तरंजित फरसा इसी तालाब मेें फेंका था और इसी कारण तब से तालाब का पानी लालिमा लिए हुए है। इसी किवदंती के कारण राम ताल हजारों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 770 एवं 774 पर करीब 70 बीघा रकबा का यह तालाब राम ताल के नाम से दर्ज है। रामताल के दक्षिण व पश्चिम हिस्से में बसी आबादी के कुछ लोगों ने इसकी काफी जमीन पर कब्जा कर पक्के निर्माण करा लिए हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हटाने की जरूरत नहीं समझी। गत जुलाई में एक स्थानीय वकील ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। इसके बाद एसडीएम के आदेश पर गठित राजस्व टीम ने नापजोख करके कब्जा करने वाले 18 लोग चिन्हित किए थे। संबंधितों को नोटिस भी जारी हुए, लेकिन बाद में कोई कार्यवाही नहीं हुई। एसडीएम सतीश चंद्रा ने बताया कि पुलिस फोर्स उपलब्ध होते ही अवैध अतिक्रमण को हटवा दिया जाएगा।
तिलहर में उम्मरपुर के तालाब पर कब्जों की भरमार
तिलहर। मोहल्ला उम्मरपुर में लगभग ढाई सौ साल पुराने 11 बीघा रकबा वाले तालाब की आठ बीघा जमीन पर आसपास के लाग पक्के मकान बना चुके हैं। तालाब के शेष भूभाग पर गत वर्ष एक भू माफिया ने कब्जा कर उसे पाट दिया और बाद में जमीन अपनी बताकर उसकी बिक्री कर दी। वर्तमान में तालाब पाटकर उसके चारों ओर बाउंड्री वाल खड़ी करके गेट लगा दिया गया है। मोहल्ला उम्मरपुर काफी बड़ा है और उसके आसपास का सारा पानी इसी तालाब मेें समाता रहा है। मोहल्ले में जल संचय का एक बड़ा साधन यह तालाब था। तालाब के रहते उसके आसपास भूजल स्तर में कभी गिरावट नहीं आई लेकिन जब से तालाब का वजूद सिमटा है, मोहल्ले का ग्राउंड वाटर लेवल बुरी तरह प्रभावित हुआ है और हैंडपंप बेकार साबित हो रहे हैं। लोग दोबारा बोरिंग कराके पेयजल की समस्या का निदान कर रहे हैं। पश्चिम दिशा से एक नाला भी तालाब में आकर गिरता था, जिसे भूमाफिया ने बंद कर दिया है। इससे बारिश के दिनों में पानी मोहल्ले में भर कर लोगों के लिए संकट पैदा कर रहा है।
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बचपन में तालाब में अक्सर मछलियां पकड़ा करते थे। उन दिनों यह तालाब बहुत बड़ा था। तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाए जाने की जरूरत है।- -शरीफ , मोहल्ला उम्मरपुर (तिलहर)
बुजुर्गों के समय का यह तालाब बहुत पुराना है, लेकिन अफसरों की लापरवाही का फायदा उठाकर उस पर लोगों ने पक्के मकान खड़े कर लिए। -अनवार, मोहल्ला उम्मरपुर (तिलहर)
अधिकारियों की बात
अधिकांश भूभाग पर पहले से अतिक्रमण है। पिछले साल एक भूमाफिया ने राजस्व कर्मचारियों से साठगांठ करके तालाब को अपना गाटा नंबर 39 बताते हुए उसकी बिक्री कर दी। तहसील स्तर पर पत्राचार का कोई नतीजा नहीं निकलने पर रिपोर्ट शासन को भेजी है।- सर्वेश कुशवाहा, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद
गाटा संख्या 63 की नाप-जोख राजस्व, चकबंदी तथा नगरपालिका की टीम द्वारा संयुक्त रूप से कराई जा चुकी है। यह गाटा संख्या घनी आबादी में होने से उसे चिन्हित करना संभव नहीं हो सका। संयुक्त टीम से दोबारा जांच कराकर अवैध कब्जे जल्द हटाए जाएंगे। - मोईन उल इस्लाम, एसडीएम, तिलहर