शाहजहांपुर। पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग में प्रस्तुत किए बिजली दरों के नए स्लैब में कम खपत करने वाले छोटे उपभोक्ताओं को महंगी बिजली देने का प्रस्ताव रखा है। मगर कुछ लोगों का कहना है कि बिजली का बिल महंगा होने से आम आदमी को घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। जीएसटी के दायरे से बाहर आने वाले छोटे दुकानदार और घरेलू उपभोक्ता इस फैसले के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 200 यूनिट तक बिजली खपत की दरें यथावत रखीं जाएं और इससे ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वालों पर ही बढ़ी दरों का बोझ डाला जाना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्र में अति निर्धन श्रेणी के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को लाइफ लाइन स्कीम के तहत दिए गए एक किलोवाट के कनेक्शनों पर बिजली दरें यथावत रखना अच्छी बात है, लेकिन अधिकारियों को शहरी गरीबों का भी ख्याल रखना चाहिए।
- विनय गुप्ता, जनरल स्टोर व्यवसायी
पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों का फैसला समझ से परे है। गरीब तबके के लोग किफायत से बिजली खर्च करते हैं। इसलिए उन पर बढ़ी दरों का बोझ डालना नाइंसाफी होगी। अधिकारी नियामक आयोग को दिया गया प्रस्ताव वापस लें।
- अतुल कुमार, स्टेशनरी व्यवसायी
अभी तक बिजली की कम खपत करने वालों को बड़े उपभोक्ताओं की तुलना में सस्ती बिजली मिलती रही, लेकिन सरकार का खजाना भरने की वाहवाही लूटने के लिए पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी महंगाई से जूझ रहे गरीबों की जेब काटने पर आमादा हैं।
- उदयवीर सिंह, पक्का तालाब
सरकार ऊर्जा की खपत कम करने की बात करती है। ऊर्जा बचाने का सरकारी स्तर पर प्रचार किया जाता है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी चाहते हैं कि लोग बिजली की बचत कम करें जिससे कि विभाग की आमदनी बढ़े। छोटे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाना ठीक नहीं है।
- विकास चंद्रा, रोशनगंज