जलालाबाद (शाहजहांपुर)। मारपीट में घायल सब्जी विक्रेता रामपति (60) की मौत के बाद बुधवार शाम उनके घर की महिलाओं ने बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर हंगामा किया। महिलाएं नगर के मुख्य चौराहे के पास हाईवे पर लेट गईं और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगीं। करीब आधे घंटे तक चले हंगामे के कारण हाईवे की एक लेन पर वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद महिलाओं को समझाकर घर भेजा। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए लेजाया गया।
नगर स्थित पुराने अस्पताल (पीएचसी) परिसर में रहने वालीं रामपति सब्जी बेचतीं थीं। 16 अक्तूबर को अस्पताल परिसर में विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट हुई थी। मंगलवार रात करीब आठ बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद बुधवार शाम करीब चार बजे उनके घर की तीन महिलाएं अचानक हाईवे पर पहुंच गईं और सड़क पर लेटकर प्रदर्शन करने लगीं।
महिलाओं का आरोप था कि रामपति के साथ मारपीट के बाद वे लोग थाने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। वे आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और इंसाफ की मांग को लेकर नारे लगा रहीं थीं। पुलिस एक महिला को हटाती तो दूसरी हाईवे पर लेट जाती। काफी प्रयास के बाद पुलिस ने सभी को काबू में किया।
मृतका के बेटे हृदयनारायण की तहरीर पर पुलिस ने वीरेंद्र सिंह, उसके बेटे सौरभ उर्फ अजय और भाई नीलू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। तहरीर के मुताबिक हृदयनारायण करीब 25 वर्षों से अस्पताल परिसर में परिवार के साथ रह रहे हैं और उनकी मां वहीं मड़ैया के सामने सब्जी की दुकान लगाती थीं। आरोप है कि दुकान लगाने के बदले वीरेंद्र और उसके बेटे रुपये मांगते थे।
16 अक्तूबर को रुपये न देने से नाराज वीरेंद्र ने अपनी गाय खोलकर मड़ैया की ओर दौड़ा दी। हृदयनारायण का छोटा बेटा गाय की चपेट में आने से बाल-बाल बचा। शिकायत करने पहुंचने पर आरोपियों ने रामपति की लाठी-डंडों से पिटाई की। इसमें उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। इलाज के दौरान मंगलवार रात उनकी मौत हो गई। सीओ दीपक सिंह ने बताया कि तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है।
पुरानी पीएचसी की जमीन पर कब्जों का आरोप
नगरिया में नया सीएचसी बनने के बाद पुरानी पीएचसी परिसर में कर्मचारियों के आवास और अन्य भवनों पर लोगों के कब्जे हैं। कई लोग जिला पंचायत से आवंटन का दावा करते हैं, जबकि कुछ पर दबंगई के बल पर कब्जा करने का आरोप है। परिसर खाली कराने के कई प्रयास हो चुके हैं। करीब छह माह पहले जिला पंचायत ने यहां दुकानें बनाने का प्रयास किया था, लेकिन कब्जेदारों के विरोध के कारण काम रोकना पड़ा। आरोपी सौरभ उर्फ अजय सिंह भाजपा ग्रामीण मंडल का महामंत्री था। कुछ माह पहले इसी जमीन से कब्जा हटाने गई जिला पंचायत की टीम से हुई झड़प के दौरान अजय सिंह की भाजपा नेताओं के खिलाफ बयानबाजी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उसे पद से हटा दिया गया था।
बरेली हाईवे के किनारे मुख्य बाजार में स्थित होने के कारण पीएचसी की जमीन काफी कीमती मानी जाती है। परिसर की एक इमारत में सरकारी होम्योपैथिक केंद्र और एक हिस्से में टीकाकरण का काम होता है। आरोप है कि रास्तों और खाली जमीन के बड़े हिस्से पर सब्जी विक्रेताओं समेत अन्य लोगों का कब्जा है। पीएचसी की जमीन पर जिला पंचायत और स्वास्थ्य विभाग दोनों अपना अधिकार जताते हैं, जिसके चलते कब्जों का मामला लंबे समय से उलझा हुआ है।
जलालाबाद में हंगामे के दौरान पुलिस से नोकझोंक करती महिला। संवाद
जलालाबाद में हंगामे के दौरान पुलिस से नोकझोंक करती महिला। संवाद
जलालाबाद में हंगामे के दौरान पुलिस से नोकझोंक करती महिला। संवाद
जलालाबाद में हंगामे के दौरान पुलिस से नोकझोंक करती महिला। संवाद