जीएफ कॉलेज में ‘रेशमी रूमाल तहरीक और शैखुल हिंद मौलाना महमूद हसन’ पर दो दिवसीय सेमिनार शुरू हो गया। इस अवसर पर स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद मुख्य अतिथि दारुल उलूम देवबंद के मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी ने कहा कि जुल्म को रोकना पूरी इंसानियत की मुश्तरका जिम्मेदारी है। कुरआन में कहा गया है कि दुनिया में जहां कहीं भी जुल्मो-सितम हों, वहां मजहबों-मिल्लत का फर्क भूलकर इंसाफ पसंद लोगों को उसके खिलाफ खड़ा हो जाना चाहिए। मौलाना बिजनौरी ने कहा कि शैखुल हिंद का उद्देश्य सिर्फ हिंदुस्तान में जम्हूरी हुकूमत कायम करना नहीं था, बल्कि वे पूरे विश्व में साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्होंने अफगानिस्तान में प्रोविजनल सरकार का गठन किया, जिसके प्रेसीडेंट राजा महेंद्र प्रताप थे। कहा: दारुल उलूम का इतिहास कुर्बानियों का रहा है, लेकिन किन्हीं कारणोंवश उसे भुला दिया गया।
इससे पूर्व डॉ. इशरत अल्ताफ ने तिलावते कुरआन से सेमिनार का आगाज किया। प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने स्वागत भाषण दिया। इसी कड़ी में प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद मुईनुद्दीन मियां ने अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। बाद में प्राचार्य ने उन्हें भी सम्मानित किया। उद्घाटन सत्र में संयोजक डॉ. मोहम्मद तैयब ने विषय प्रवर्तन किया। इसके बाद संत कबीरनगर के मौलाना माशूक अहमद मजाहिरी, द्वितीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. कमरुद्दीन कासमी, मोहम्मदी के मौलाना इस्लामुल हक, जीएफ कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. इफजालुर्रहमान खान आदि ने शोध पत्र पढ़े। डॉ. अब्दुल मोमिन, डॉ. जीए कादरी के संचालन में हुए आयोजन में डॉ. अब्दुल वहाब ने आभार व्यक्त किया। अध्यक्षता मुरादाबाद के मदरसा इमदादिया के मौलाना असजद कासमी ने की।
आयोजन में कालेज प्रबंधक मलक अब्दुल वाहिद खां, उपाध्यक्ष जुल्फिकार अहमद, अब्दुर्रशीद खान, खालिद अलवी, डॉ. आफताब अख्तर, मो. सलीम खां, वकार अहमद आदि गणमान्य मौजूद रहे। व्यवस्था में डॉ. अनवर मसूद, डॉ. फैयाज अहमद, डॉ. जमील अहमद, डॉ. समीर पाठक, डॉ. युक्ति माथुर, डॉ. साजिद, डॉ. अरशद, डॉ. आयशा, सैयद अनीस अहमद आदि का योगदान रहा।