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निजी कॉलेजों ने किया खेल, प्रवेश शुरू होने से पहले ही छात्रों से वसूल ली फीस

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शाहजहांपुर। लॉकडाउन में स्ववित्तपोषित कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों ने छात्रों को गुमराह कर प्रवेश में बड़ा खेल किया। उन्होंने इंटर का रिजल्ट आने के बाद पास होने वाले छात्रों के मोबाइल नंबर जुटाकर उनसे फोन पर संपर्क किया और उन्हें अपने यहां प्रवेश देने का लालच दिया। छात्रों से फीस लेकर प्रवेश पक्का कर दिया। अब हाल यह है कि सीट लॉक होने के बाद इन छात्रों को उनके मनचाहे महाविद्यालय में आवेदन करने के बावजूद प्रवेश नहीं मिल रहा है। मालूम हो कि एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने इस संबंध में प्राचार्यों को पत्र भेजकर उन्हें चेतावनी भी दी है कि यदि उन्होंने किसी भी छात्र को गुमराह कर प्रवेश दिया तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने टीम बनाकर इंटर पास छात्रों से फोन पर संपर्क कर वित्तपोषित कॉलेजों में भविष्य में आने वाली समस्याओं को गिनाकर छात्रों को भ्रम में डाल दिया। उन्हें अपने कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। इतना ही नहीं, इन छात्रों से बाकायदा शुल्क के नाम पर कुछ रुपये भी जमा करा लिए। जब प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई तो इन छात्रों ने वित्तपोषित कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवेदन किया, लेकिन तीन सितंबर को जब विश्वविद्यालय ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के साथ सीटें लॉक करनी शुरू की, तो इन छात्रों को मनचाहे कॉलेज में प्रवेश से वंचित होना पड़ा, क्योंकि उनकी सीट पहले लॉक हो चुकी थी। अब छात्र परेशान होकर विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। ताकि उनकी सीट फिर से अनलॉक हो जाए और वित्तपोषित कॉलेज में उन्हें प्रवेश मिल सके।
छात्रों को गुमराह करने में शहर के नामचीन महाविद्यालयों के साथ कुछ नए कॉलेज भी शामिल है। बताया जाता है कि इसी कारण विश्वविद्यालय द्वारा तीन सितंबर को जैसे ही प्रवेश के लिए साइट खोली गई तो पहले ही दिन 50 हजार के आसपास प्रवेश हो गए थे।
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कुलसचिव ने दी कठोर कार्रवाई की चेतावनी
एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने इस संबंध में प्राचार्यों को पत्र भेजकर उन्हें चेतावनी भी दी कि यदि उन्होंने किसी भी छात्र को गुमराह कर प्रवेश दिया तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अभ्यर्थियों की इच्छा के विरुद्ध या धोखे से अथवा जबरदस्ती प्रवेश बिल्कुल न दिया जाए, ऐसा करना विश्वविद्यालय द्वारा निर्गत निर्देशों की अवमानना होगी। कुलसचिव ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि महाविद्यालयों ने अभ्यर्थियों का प्रवेश अपने महाविद्यालय में छात्रों की जानकारी के बिना और उनकी इच्छा के बिना कर लिया है और कतिपय महाविद्यालयों ने छात्रों के मोबाइल पर प्रवेश सुनिश्चित हो जाने का मेसेज भेजा है। इस प्रकार का कृत्य विश्वविद्यालय के निर्देशों की अवमानना है, इसलिए ऐसे कृत्यों वाले महाविद्यालयों को चेतावनी दी जाती है कि आनलाइन प्रवेश के लिए जारी निर्देशों का पालन किया जाए, अन्यथा संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी मिली है कि कुछ कॉलेजों ने छात्रों को गुमराह कर अपने यहां प्रवेश सुनिश्चित कराने को उनसे संपर्क किया। अब ऐसे छात्र परेशान घूम रहे हैं। इसमें स्ववित्तपोषित कक्षाओं को भरने के लिए अधिक प्रयास किए गए हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था। अगर किसी छात्र को इस प्रकार की परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो वह विश्वविद्यालय से संपर्क कर अपनी सीट फिर से अनलॉक कराकर मनचाहे कॉलेज में प्रवेश ले सकता है।
- डॉ. अवनीश कुमार मिश्र, प्राचार्य एसएस कॉलेज, शाहजहांपुर
डिग्री कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तारीख बीती, खाली रह गईं सीटें
शाहजहांपुर। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में प्रवेेश की अंतिम तिथि शनिवार को निकल गई, लेकिन अभी लगभग सभी महाविद्यालयों में सीटें रिक्त पड़ी हैं। कॉलेजों के प्राचार्य प्रवेश तिथि बढ़ने की आस लगाए बैठे हैं, उन्हें उम्मीद है कि अभी तारीख जरूर बढ़ेगी।
इन कॉलेजों में लक्ष्य से काफी कम हुए प्रवेश
जीएफ कॉलेज, आर्य महिला महाविद्यालय, एसएस कॉलेज के प्राचार्यों ने बताया कि शनिवार को प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथि होने के कारण काफी सीटें रिक्त रह गई हैं। अंतिम दिन जीटीआई की संयुक्त प्रवेश परीक्षा होने के कारण महाविद्यालयों को सेंटर बनाया गया था, जिस कारण अंतिम दिन स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए छात्र नहीं आ सके। इसलिए विश्वविद्यालय को प्रवेश तिथि बढ़ानी चाहिए। जीएफ कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनयू खान ने बताया कि विश्वविद्यालय से बात हुई है, उम्मीद है कि कम से कम दो दिन बढ़ जाएंगे। आर्य महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कनकरानी ने बताया कि अभी वह लक्ष्य से काफी दूर हैं। भरपूर आवेदन नहीं आने से सीटें रिक्त रह सकती हैं।
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