एक अप्रैल से 31 मार्च तक शैक्षिक सत्र शुरू करने की घोषणा ने अभिभावकों की जेब पर इस कदर डाका डाला कि वे आज तक संभल नहीं पाए हैं। स्कूल-कॉलेजों को फीस वसूली का मौका मिल गया, इसलिए उन्होंने बीते सत्र में अप्रैल, मई और जून का शुल्क अभिभावकों से ले लिया। सत्र परिवर्तन की सूचना से उनकी बांछें खिल गईं और पहली अप्रैल से स्कूल संचालकों ने तीन माह का एकबार शुल्क और वसूल कर डाला। जब हाय-तौबा मची तो प्रधानाचार्य और संचालक अपने अलग-अलग तर्क देने लगे, जिससे शुल्क वापसी न करनी पड़े।
शुल्क को लेकर पहले तो किसी अधिकारी अथवा शासन ने कोई तब”æो नहीं दी। बाद में जब अभिभावकों ने शिकायत करनी शुरू की तो सात जुलाई को शिक्षा निदेशक ने अतिरिक्त लिए गए शुल्क को वापस करने के स्पष्ट आदेश जारी किए और डीआईओएस को उसका पालन कराने को कहा। डीआईओएस ने भी शिक्षा निदेशक के पत्र के आधार पर प्रधानाचार्यों को शुल्क समायोजन/वापसी के निर्देश दे दिए हैं।
इस संबंध में डीआईओएस कमलाकर पांडेय ने कहा कि उन्होंने समस्त प्रधानाचार्यों को शुल्क वापसी अथवा समायोजन केेे स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं और मीटिंग में मौखिक रूप से भी निर्देशित कर दिया है। अभिभावकों को थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है, प्रधानाचार्यों को शुल्क वापस करना ही होगा। शिक्षा निदेशक के आदेश का पालन करना उनका दायित्व है। यदि कोई प्रधानाचार्य शुल्क का निस्तारण नहीं करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।