शनिवार को दोपहर आए भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए और जनजीवन बेचैन हो उठा। दिन में 11.40 बजे से भूकंप के झटके महसूस किए जाने लगे और बमुश्किल दस सेकेंड बाद उनकी तीव्रता बढ़ गई। करीब 40 सेकेंड तक धरती रुक-रुककर कांपती रही। इस कारण भयभीत लोग दफ्तरों और मकानों से बाहर निकल आए। सड़कों पर जगह-जगह लोगों का समूह जमा होकर भूकंप के अनुभव बांटने लगे। जिले में अन्य सभी स्थानों पर भी भूकंप के झटके महसूस किए, लेकिन जान-माल की कोई क्षति नहीं हुई।
सप्ताह का अंतिम दिन होने के कारण बैंकों, न्यायालयों और सरकारी दफ्तरों में रोजाना की तरह काम हो रहा था। अचानक टेबिलों पर रखे कंप्यूटर और छतों पर टंगे पंखे पेंडुलम की तरह हिले और लोगों को धरती कांपती हुई महसूस हुई। दस सेकेंड में कंपन की तीव्रता बढ़ी तो लोगों को भूकंप का अहसास होते ही उनमें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए भगदड़ मच गई। सेठ एनक्लेव में बरेली कारपोरेशन बैंक, एक्सिस बैंक का स्टाफ ग्राहकों के साथ बाहर निकल आया। विवेकानंद लाइब्रेरी में भी भगदड़ जैसे हालात हो गए।
जजी परिसर में न्यायिक अधिकारी और वहां का स्टाफ, कलक्ट्रेट में प्रशासनिक अधिकारी समेत वहां के विभिन्न दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों ने फाइलें बगल में दबाई और पटल छोड़कर बाहर निकल आए। जो लोग बाजारों में खरीददारी करने पहुंचे, उनमें घर लौटने की बेताबी बढ़ गई। सवा 12 बजे भूकंप के दोबारा झटके लगने के कारण लोग मकानों और दफ्तरों के अंदर जाने को देर तक कतराते रहे। हर कोई एक-दूसरे से भूकंप के अनुभव बांटने में जुटा रहा। इस वजह से दफ्तरों में करीब दो घंटे तक कामकाज प्रभावित हुआ।
अस्पताल में भर्ती मरीज
वार्ड छोड़कर बाहर भागे
जिला अस्पताल में भर्ती जो मरीज चलने-फिरने में कमजोरी महसूस कर रहे थे वो भी बेड छोड़कर तीमारदारों संग वार्डों से भाग निकले। कई मरीज हाथ में लगी सेलाइन ड्रिप की बॉटल दूसरे हाथ से खुद उठाकर बाहर आते दिखे। मरीजों में भूकंप का इस कदर खौफ रहा कि दो घंटे तक वार्डों में जाने से कतराते रहे।
होटल का प्लास्टर चटखा,
मुड़ गई स्ट्रीट लाइट
भूकंप के झटकों के दौरान टाउनहाल के रॉयल पन्ना होटल की एक दीवार का प्लास्टर चटख गया। इससे होटल का स्टाफ खौफजदा हो गया। इसी होटल के पास नगरपालिका परिषद की स्ट्रीट लाइट का सोडियम लैंप मुड़ गया। हालांकि, भूकंप से शहर में बिजली लाइनों को कोई क्षति नहीं पहुंची।