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कमाई 15 लाख की, सुविधाएं धेला भर नहीं

Mon, 08 May 2017 11:46 PM IST
लोकेश आर्य तिलहर।
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स्‍टटेश्‍ान - फोटो : अमर उजाला
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 पीने के लिए पानी तक मयस्सर नहीं है मुसाफिरों को
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रात को प्लेटफार्म पर बना रहता है अंधेरा 
तिलहर रेलवे स्टेशन को प्रति माह पंद्रह लाख रुपये की कमाई होती है, लेकिन इस अनुपात में यात्रियों को सुविधाएं न के बराबर हैं। कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज नहीं होने के कारण यात्री बेहद परेशान हैं। यहां स्टेशन पर सबसे बड़ी समस्या इन दिनों पेयजल की है। हैंडपंप खराब पड़े हैं। यात्रियों को गला तर करने के लिए मजबूरन पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।
तिलहर रेलवे स्टेशन के दोनों प्लेटफ ार्म पर वाटर लाइन सप्लाई की सुविधा नहीं है। प्लेटफ ार्म पर लगे हैंडपंपों में भी कुछ खराब पड़े हैं। इससे इस भीषण गर्मी में पेयजल की समस्या बनी हुई है। सफ ाई कर्मियों की कमी होने से शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं। रोशनी के लिए लगे स्टेंड पोस्ट के लिए बिजली की सप्लाई तिलहर नगर फ ीडर से होती है सप्लाई बाधित रहने पर लाइट नहीं जल पाती है। जिससे रात के समय प्लेटफार्म पर अंधेरा छाया रहता है। रेलवे को टिकट बिक्री से हर महीने 15 लाख रुपये आय हैं। इसके बावजूद यहां सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। नगरवासी लंबे अरसे से त्रिवेणी एक्सप्रेस, जनता एक्सप्रेस और दिल्ली जाने के लिए सीधी ट्रेनों सहित कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को यहां रोके जाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन इन ट्रेनों के स्टॉपेज पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ट्रेनों के स्टॉपेज और सुविधाएं बढ़ाने के लिए कई बार आंदोलन कर चुके हैं तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्र भी लिखे जा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। 
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रेलवे ट्रैक पार करना मजबूरी
तिलहर नगर की आबादी रेलवे स्टेशन के दक्षिण दिशा में है, जबकि प्लेटफ ॉर्म पूर्वी दिशा में है। ऐसे में यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद रेलवे नियमों का उल्लंघन करते हुए रेलवे ट्रैक से गुजर कर नगर में प्रवेश करना पड़ता है। नगरवासी पुल नंबर एक से नंबर दो प्लेटफ ार्म को जोड़ने वाले इस पुल के विस्तारीकरण की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 
 
जनप्रतिनिधि भी नहीं दे रहे ध्यान
जनप्रतिनिधि भी इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर वासियों को मोदी सरकार से खासी अपेक्षाएं हैं। समय रहते रेल मंत्री सुरेश प्रभु इस ओर अपनी नजरें इनायत करके नगरवासियों को कुछ सुविधाएं प्रदान कर सकेंगे यह तो अब समय ही बताएगा।
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स्टेशन पर स्टाफ की कमी और अन्य समस्याओं की पीसीजीओ रिपोर्ट प्रतिमाह विभाग को भेजी जाती है। ट्रेनों के स्टॉपेज और अन्य समस्याओं के संबंध में जो भी शिकायती पत्र मिलते हैं उन्हें भी कार्यवाही के लिए उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाता है।
          गिरीश चंद्र श्रीवास्तव 
           स्टेशन मास्टर
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