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Shahjahanpur News: साहित्य की सेवा के साथ प्रकृति का संरक्षण कर रहे डॉ. साजिद खान

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शाहजहांपुर। बाल साहित्यकार डॉ. साजिद खान, जो साहित्य के साथ प्रकृति प्रेमी भी हैं। उन्होंने अपने घर में देशी-विदेशी फूलों का कोना और सामने प्लॉट पर फलों-सब्जियों की क्यारियां सजाई हैं। कुछ दिन पहले मिले गिलहरी के एक बच्चे को अपने परिवार का सदस्य बनाकर उसको गिल्लू नाम दिया है। वह खुद कई प्रकार से प्रकृति का संरक्षण करते हैं। साथ में अन्य लोगों को भी प्रकृति के प्रति उनके दायित्वों से अवगत कराते हैं।
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घर में देशी-विदेशी फूलों का कोना जीएफ कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर डॉ. साजिद बाल साहित्यकार होने के कारण अक्सर सैर करते हैं। वह जहां भी जाते हैं, वहां से पौधा लेकर लौटते हैं। उन्होंने निगोही रोड के पास साहित्यपुरम कॉलोनी में एक मकान खरीदा है। उसमें बागवानी के लिए 30 गुणा 30 का एक बगीचा बनाया है। वहां विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे पौधे लगे हुए हैं।
इनमें गोल्डन यूनीप्रेस (यूनिपर), देशी मधुकामिनी, एडेमियम (रेगिस्तानी गुलाब) समेत पाकड़, बरगद और पीपल के बोसाई अलग ही छटा बिखेरते हैं। उनके बगीचे में नेपाल से लाए गए पौधे आकर्षण का केंद्र हैं। इसकी देखरेख प्रोफेसर खुद ही करते हैं।
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फलों-सब्जियों से पटा प्लॉट
- डॉ. साजिद अपने मकान के सामने एक प्लाॅट पर फल और सब्जियां उगाते हैं। संतरा, नींबू, अमरूद, लीची, चेरी, आम, शरीफा, जामुन के अलावा लौकी, तुरई समेत कई सब्जियों से प्लॉट पटा हुआ है। डॉ. साजिद ने बताया, कोई भी फल-सब्जी उगाने से पहले वह उसका अध्ययन करते हैं। इसके बाद ही उसके लिए निराई-गुड़ाई की जाती है।
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कुछ दिन पहले मिली गिल्लू - डॉ. साजिद को कुछ दिनों पहले सड़क किनारे गिलहरी का एक बच्चा मिला। वह उसको अपने साथ ले आए। उसको अपने साथ लेकर आए और नाम रखा गिल्लू। गिल्लू के लिए एक छोटा पिंजरा और कपड़े का बिस्तर तैयार करवाया। अब गिल्लू उनका साथी और परिवार का सदस्य बन चुका है।

एक व्यक्ति-एक पौधा अभियान के तहत लोगों को कर रहे जागरूक
शाहजहांपुर। मानवता वेलफेयर सोसाइटी एक सामाजिक संस्था है, जिसके जरिये लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित किया जाता है। संस्था की ओर से पिछले चार वर्षों में शहरी व ग्रामीण इलाकों में करीब तीन हजार पौधे रोपे गए हैं। इसके संस्थापक अमित श्रीवास्तव ने बताया कि एक व्यक्ति-एक पौधा अभियान के तहत विभिन्न स्कूल, कॉलोनी, पार्क, सरकारी दफ्तर और झुग्गी-झोपड़ी वाले क्षेत्रों में लोगों खासकर युवाओं को पौधा रोपने और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। संवाद
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