शाहजहांपुर में नवरात्र पारायण के बाद दशमी मंगलवार को कुर्रियाकलां गांव के ऐतिहासिक देवी मंदिर के कपाट सुबह चार बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने से पहले पुजारी गुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी का आह्वान कर मंदिर में स्थापित सभी प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना की। बुधवार को दूसरे दिन भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
छह माह से मां के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचे और जयकारों के साथ दर्शन किए। भीड़ अधिक होने से कई बार मंदिर परिसर में अव्यवस्था की स्थिति बनी, जिसे पुलिस ने संभाला। सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर और विधायक अरविंद सिंह ने भी मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। पुजारी ने उन्हें चुनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया। परिसर में भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्था में अनुज दीक्षित, मनुज दीक्षित, अमित दीक्षित, अरविंद दीक्षित और देव आदि मौजूद रहे।
तंत्र साधना से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
पुजारी पं. गुरुदेव प्रसाद दीक्षित के अनुसार ओयल के प्रसिद्ध मेंढक मंदिर की तरह गांव का यह देवी मंदिर भी तंत्र साधना की परंपरा से जुड़ा है। मंदिर की नींव में कच्छप जैसी आकृति बनी है। मान्यता है कि ओयल रियासत में एक कारीगर ने तांत्रिकों के सामने शंकर जी की काष्ठ प्रतिमा को हंसाने की शर्त रखी थी। इसमें उनके पूर्वज पंडित सहतावन लाल भी शामिल हुए थे। काफी प्रयास के बाद भी जब तांत्रिक प्रतिमा को नहीं हंसा सके तो सहतावन लाल ने अभिमंत्रित पान प्रतिमा के अधरों से लगाया। इसके बाद शिव प्रतिमा मुस्कुराती हुई प्रतीत हुई। शर्त के मुताबिक राजा ने प्रतिमा उन्हें दे दी, जिसे वह गांव ले आए।