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जीआईसी चांदापुर : छात्राओं के शौचालय से दरवाजे गायब, पढ़ाने के लिए शिक्षक का अभाव

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ददरौल (शाहजहांपुर)। शहर से गांवों तक छात्र-छात्राओं की शिक्षा के लिए सरकार ने राजकीय इंटर कॉलेज का निर्माण करा दिया पर व्यवस्था चौपट है। कॉलेज के लिए छात्र-छात्राओं को कीचड़ से गुजरना पड़ता है। छात्राओं के शौचालय में दरवाजे नहीं है। वहीं पढ़ाने के लिए पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध नहीं है।
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ददरौल ब्लॉक का राजकीय इंटर कॉलेज चांदापुर काफी खराब दौर से गुजर रहा है। कक्षा छह से 12 तक संचालित होने वाली कक्षाओं में 1300 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसमें 55 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं। कॉलेज के अंदर जाने वाला रास्ता ही दुरस्त नहीं है। यह कच्चा रास्ता होने के कारण बारिश होने पर जलभराव की समस्या हो जाती है। कीचड़ तो हर समय रहता है। कॉलेज का भवन भी जर्जर हालत में है।
कक्षा छह, नौ और दस के बच्चों के बैठने के लिए कमरे तक नहीं है। बच्चों को बरामदे में दरी पर बैठाना पड़ता है या उनकी कक्षाएं प्रयोगशाला में चलती हैं। गर्मी के दिनों में प्रयोगशाला में बैठना मुश्किल हो जाता है। यहां पंखे तक खराब पड़े हैं, जिसके चलते बच्चों को दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है।
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छात्राओं के दो शौचालय में दरवाजे तक नहीं
हर घर में शौचालय को लेकर जहां अधिकारी काफी जोर दे रहे हैं। वहीं जीआईसी चांदापुर में छात्राओं के लिए बने दो शौचालयों में दरवाजे तक नहीं है। दरवाजे न होने के कारण छात्राओं के सामने बड़ा संकट हो जाता है। छात्राओं ने अधिकारियों से कई बार शिकायत की। अभी तक दरवाजे लगवाने की जरूरत नहीं समझी गई है।
कॉलेज में प्रवक्ता के पद खाली, प्रमुख विषयों के टीचर नहीं
जीआईसी में प्रवक्ता के पद खाली पड़े हैं। 18 शिक्षकों का स्टाफ स्वीकृत है। इसमें प्रवक्ता के सभी छह पद खाली हैं। प्रवक्ता न होने के कारण शिक्षण व्यवस्था की बदहाली का अंदाजा लगाया जा सकता है। कॉलेज के 1300 बच्चों की शिक्षा के लिए चार अध्यापक कार्यरत हैं। सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और संस्कृत के शिक्षक ही कॉलेज की शिक्षा व्यवस्था को संभाले हैं।
छत का फर्श टूटकर गिर रहा, पानी तक को तरस रहे छात्र
विद्यालय का भवन काफी जर्जर हो चुका है। भवन के कमरों की हालत खराब हो गई। छत और दीवारों का फर्श टूटकर गिर रहा है। इसके चलते बच्चे हर समय दहशत में रहते हैं। वहीं स्कूल में लगा नल तक खराब पड़ा है। बच्चों को पानी के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है।
शिक्षक की नियुक्ति शासन स्तर का मामला है। शिक्षक की भर्ती होने पर वहां स्टाफ पूरा किया जाएगा। शौचालय में दरवाजे के न होने के बारे में प्रधानाचार्य से बात करेंगे। अन्य व्यवस्थाएं भी सही की जाएंगी।- शौकीन सिंह यादव, डीआईओएस
जीआईसी चांदापुर के प्रधानाचार्य व डीआईओएस से वार्ता की जाएगी। लड़कियों के शौचालय में दरवाजे नहीं होना गंभीर विषय है। व्यवस्थाओं को दुरस्त कराया जाएगा।- मानवेंद्र सिंह, विधायक-ददरौल
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