एनआरएचएम घोटाले का जिन्न एक बार फिर योगी सरकार में बाहर आ गया है। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के रुपये के दुरुपयोग के मामले में सीबीआई ने एक डॉक्टर और चार फार्मासिस्टों को रिकार्ड के साथ लखनऊ तलब किया है।
जिले के स्वास्थ्य विभाग के दामन पर 2011 में एनआरएचएम घोटाले का दाग लगा था। यहां उपकरणों की खरीद को लेकर अनियमितता पाई गई। इस मामले में हाईकोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच में मुकदमा विचाराधीन है। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सपा सरकार में इस केस की जांच तीन साल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद एक बार फिर से केस की विवेचना में तेजी आ गई है। जांच कर रही सीबीआई लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी अनिल कुमार ने सीएमओ डॉ. कमल कुमार को पत्र भेजकर एक डॉक्टर समेत चार फार्मासिस्टों को रिकार्ड के साथ लखनऊ बुलाया है। घोटाले की जांच को जिन लोगों को तलब किया गया है उनमें डॉ. नरेंद्र पाल, फार्मासिस्ट संदीप कपूर, अजय कुमार सक्सेना, मोहम्मद रियाज सिद्दीकी, हेल्थ सुपरवाइजर विनोद कुमार त्रिपाठी हैं। इन सभी के मोबाइल नंबर भी सीबीआई ने मांगे हैं। इससे पहले एनआरएचएम घोटाले में आरोपी रहे जिले के पूर्व सीएमओ को जेल भी हो चुकी है। सीएमओ कार्यालय में तैनात एक बाबू भी सीबीआई के निशाने पर हैं। सूत्रों की माने तो बाबू की गर्दन भी सीबीआई की पकड़ में है। इससे पहले 2014 में इसी केस में सीबीआई ने जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर छापा मारकर एनआरएचएम के तहत खरीदे गए उपकरणों को सील किया था। इन उपकरणों को सूचीबद्ध कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्टों से दो दिन लगातार लखनऊ में सीबीआई ने पूछताछ की थी।
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वह तो पुराना मामला चल रहा है। उसी में बीच-बीच में गवाही के लिए बुलाया जाता है। इसीलिए बुलाया गया होगा।
डा. कमल कुमार
सीएमओ