राष्ट्रीय पर्व या किसी भी अवसर पर प्लास्टिक से बने तिरंगे का प्रयोग न करें। क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज और उसके किसी भी स्वरूप के अपमान का करने पर तीन वर्ष की सजा की सजा और जुर्माना देना होगा। इस संबंध में गृह मंत्रालय के निदेशक अनुज शर्मा ने गाइड लाइन जारी कर दी है। उन्होंने कहा है कि प्लास्टिक से बने राष्ट्रीय ध्वज उपयोग में लेने के बाद उनका सम्मानजनक तरीके से निपटान करना बहुत बड़ी समस्या है। उन्होंने प्लास्टिक के झंडों का उपयोग रोके जाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन को प्राप्त सर्कुलर में निदेशक शर्मा ने कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज देश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए राष्ट्र ध्वज को हर स्थान पर सम्मान की स्थिति मिलनी चाहिए। राष्ट्रध्वज का सम्मान अक्षुण बनाए रखने के लिए बनाया गया राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 तथा भारतीय झंडा संहिता 2002 गृह मंत्रालय की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.एमएचए.एनआईसी.इन पर उपलब्ध कराई गई है। निदेशक शर्मा के अनुसार महत्वपूर्ण अवसरों पर कागज के झंडों के स्थान पर प्लास्टिक के झंडों का प्रयोग किया जा रहा है। समाज की यह प्रवृत्ति उचित नहीं है क्योंकि प्लास्टिक के झंडे जैविक रूप से अपघटित नहीं होते। इस कारण लंबे समय तक नष्ट नहीं होते और वातावरण के लिए भी हानिकारक साबित होते हैं। इन झंडों का सम्मानपूर्वक निपटान भी बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे झंडों को सार्वजनिक रूप से जलाता अथवा किसी भी तरह से विरूपित करता है तो उसे अधिनियम की धारा 2 के तहत तीन वर्ष के कारावास या जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा।