विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही पर बरसे डीएम
नवागत जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने शुक्रवार को विकास भवन सभागार में शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लिए लागू की विभिन्न विकास और निर्माण योजनाओं की प्रगति समीक्षा की। इस दौरान लोहिया आवास, मनरेगा, स्वच्छ शौचालय, ग्रामीण संपर्क मार्ग आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई पाए जाने पर डीएम आनंद की त्यौरियां चढ़ गईं। उन्होंने जवाबदेह बीडीओ, एडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारियों की क्लास लेकर उनसे विकास पर खर्च 542 करोड़ रुपये का हिसाब मांगा तो उनकी घिग्घी बंध गई। मातहतों से खचाखच भरे विकास भवन सभागार में विभिन्न योजनाओं के काम जांचते हुए डीएम विजय आनंद ने कहा कि गत पांच वर्ष में ग्रामीण विकास की विभिन्न मदों में 242 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसी तरह मनरेगा के कामों पर 300 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन यथार्थ के धरातल पर विकास की सचाई किसी से छिपी नहीं है। मनरेगा के जॉब कार्ड धारकों को केवल 30 दिवसीय औसत रोजगार मिला।
डीएम ने सवाल किया कि विकास का पैसा आखिर गया कहां? जवाब के बदले सभागार में सन्नाटा पसरा तो डीएम आनंद ने नसीहत देने वाला अंदाज अपनाते हुए कहा कि संबंध्धित अधिकारी और कर्मचारी अपनी कार्य प्रणाली तत्काल सुधार लें और किसी के भी दबाव में आए बगैर गांवों के लिए मिली धनराशि शत-प्रतिशत वहां के विकास पर खर्च करने की आदत डालें। उन्होंने सभी बीडीओ, एडीओ को 15 अप्रैल तक विकास की कार्य योजना बनाने, ग्राम स्तरीय कर्मचारियों की दिवस वार गांवों में उपस्थिति का रोस्टर बनाने, प्रत्येक ग्राम पंचायत मे मनरेगा मद में कम से कम एक लाख रुपये व्यय सुनिश्चित करने आदि निर्देश दिए। स्वच्छ शौचालय निर्माण की समीक्षा करते हुए डीएम आनंद का पारा फिर हाई हो गया, जब शौचालय निर्माण के बारे में तकनीकी सहायक जानकारी नहीं दे सके। उन्होंने शौचालय निर्माण के लिए बीडीओ के नेतृत्व में दस-दस कर्मचारियों की टीमें बनाकर प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। डीएम ने परिवार रजिस्टर की नकल अथवा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में किसी से कोई पैसा नहीं लेने की संबंधितों को हिदायत दी। बैठक में सीडीओ पुलकित खरे, डीडीओ पीपी त्रिपाठी, डीआरडीए के परियोजना निदेशक अजय प्रकाश, डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद आदि मौजूद रहे।