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जाते-जाते डीएम ने राशन  माफिया पर बिठाई जांच

Mon, 29 Aug 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
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गेहूं को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा बाजार में - फोटो : अमर उजाला
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शासन स्तर पर तबादले का फरमान जारी होने के बाद बतौर डीएम शाहजहांपुर से कार्यभार छोड़ने से पहले आईएएस पुष्पा सिंह ने राशन माफिया के खिलाफ जांच बिठा दी है। इसके लिए उन्होंने राशन वितरण में धांधली के पुख्ता प्रमाणों का ब्योरा देते हुए यह कार्रवाई की है। सरकारी सस्ता गल्ला वितरण संबंधी पकड़ में आए सभी प्रकरणों की जांच हेतु सीडीओ को नोडल अधिकारी नामित किया गया है और सभी का गहनता से जांच राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत सभी बिंदुओं का प्रभावी अनुश्रवण करते हुए एक पक्ष के भीतर सुस्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने को कहा है।
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अपनी जांच में डीएम पुष्पा सिंह ने पाया कि सितंबर के लिए जिले में 84978 यूनिट के लिए 2549.34 क्विंटल गेहूं और 1699.56 क्विंटल चावल कोटेदारों में अतिरिक्त बांट दिया गया है, जिससे बड़े स्तर पर कालाबाजारी को बढ़ावा मिलने का अंदेशा है। यही नहीं, डीएम ने यह भी पकड़ा है कि जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा 17476 कार्डों पर 60538 यूनिट के लिए 1816.14 क्विंटल गेहूं और 1210.76 क्विंटल चावल अधिक आवंटन कर दिया गया है, जबकि ये कार्ड और यूनिट ऑनलाइन प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। इस समय ऑनलाइन प्रदर्शित कार्ड और यूनिट पर ही राशन वितरण की व्यवस्था लागू है। डीएम ने शाहजहांपुर शहर के सभी कोटेदारों की दुकानों से संबद्ध राशन कार्ड धारकों का 10 दिन में सत्यापन कराकर आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। उनके अनुसार, निरीक्षण के दौरान शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण के दौरान मिला कि कोटेदारों के पास उपलब्ध आनलाइन प्रदर्शित सूची में करीब 60 फीसदी लाभार्थी अपात्र हैं। दूसरी ओर जिनकी पर्चियां बनी हैं, आधार कार्ड बने हैं और एक-दो माह का राशन भी बंटा है, उनके नाम काट दिए गए हैं और उन्हें राशन नहीं दिया जा रहा एवं उन्हें अपात्र की श्रेणी में रख दिया गया है। ऐसे पात्र लाभार्थी लगातार प्रदर्शन कर राशन की मांग कर रहे हैं एवं जनहित में इनका अलग से रजिस्टर बनाकर विवरण दर्ज कराया जाना जरूरी है एवं पात्र-अपात्र का सत्यापन कराना जरूरी है। यही नहीं, जांच में मिला है कि 28 अगस्त तक कोटेदारों के यहां काफी राशन अवशेष पड़ा हुआ है। अपात्रों को राशन न देने का आदेश देते हुए उन्होंने सत्यापन पर जोर दिया है। 
पुरानी है सियासी गलियारे से राशन माफिया की साठगांठ
शाहजहांपुर। जिले में राशन माफिया की सियासी गलियारे से साठगांठ नई नहीं, बल्कि काफी पुरानी है। पत्रकार जगेंद्र मौत प्रकरण का शुरूआत भी राशन संबंधी मामले से ही हुई थी और तब के डीएसओ पहले कार्यवाही के जद में आए थे। सरकारी सस्ते गल्ले दुकानों से खाद्यान्न वितरण में होने वाले खेल पर हाथ डालने पर अधिकारियों पर बन आती है। पहले के डीएम ने भी राशन माफिया पर अंकुश लगाया तो सत्ताधारी दल के लोगों को साथ माफिया को ही मिला। नतीजा यह हुआ कि वह 42 दिनों ही जिले में बतौर डीएम टिक पाए। फिर बीते 17 मई को बतौर डीएम चार्ज ग्रहण करने वालीं आईएएस पुष्पा सिंह ने भी इस ओर बारीकी से संज्ञान लिया जब राशन न मिलने को लेकर पात्र राशन कार्ड धारकों के सड़कों पर उतरने का क्रम बना और कानूून-व्यवस्था की स्थिति उपजी। उन्होंने पूर्ति विभाग और राशन वितरण में हो रहे खेल पर नकेल कसना शुरू किया तो मुखालफत शुरू हो गई। सत्ताधारी दल के जिलाध्यक्ष भी ऐसी ही प्रकरण में डीएम उलझे और उन्हें उनके ही दफ्तर में घेरने में सुर्खियों में आए। मामला वहीं नहीं थमा। बाद में गत दिनों रात आठ बजे कलेक्ट्रेट में बैठक के दौरान डीएम के सवाल पर गाजियाबाद निवासी एक पूर्ति निरीक्षक मूर्छित होने और बताया कि हर्ट अटैक पड़ा है। डीएम खुद उन्हें अपनी निगरानी में जिला अस्पताल ले गई और विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराने के बाद विशेष निगरानी में लखनऊ बेहतर चिकित्सा को भेजवाया। लेकिन रात को वहां पहुंचते ही जांचें शुरू होने पर रिपोर्ट में सब सामान्य निकला तो पूर्ति निरीक्षक अगली सुबह लखनऊ से मेडिकल लीव पर चले गए। पूर्ति विभाग और राशन माफिया के नेक्सस पर तब वह और सख्त हुईं और लगातार औचक निरीक्षण कर जमीनी हकीकत को स्पष्ट करने में जुटीं तो रविवार देर शाम ही उनके यहां से हटाए जाने का आदेश जारी हुआ। लेकिन नए डीएम के आने और कार्यभार ग्रहण करने से पहले अपने काम में जुटी रहीं और अब तक प्राप्त सभी तथ्यों के आधार पर राशन वितरण व्यवस्था के ताजा हालात पर खाद्य सुरक्षा अधिनियमों की कसौटी पर जांच बैठा दी।
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