- बाढ़ग्रस्त गांवों तक नहीं पहुंच पा रही प्रशासन की मदद, खाने के लाले
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। बाढ़ग्रस्त गांवों में जलभराव, दूषित पेयजल और बासी भोजन करने से सर्दी, जुकाम, खांसी, जाड़ा बुखार और पेट की बीमारियों के रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ क्षेत्र के ढाईगांव में बनाए गए आश्रय स्थल में मेडिकल कैंप लगा रखा है, लेकिन इससे बाढ़ से घिरे गांवों में पीड़ितों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिससे लोगों की दिक्कतें बढ़ती जा रहीं है। सोमवार शाम से गंगा का जलस्तर तो स्थिर रहा, लेकिन गांवों, सड़कों और खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने से दिक्कत हुई। इधर, जलालाबाद-ढाईघाट स्टेट हाईवे पर चल रहे बाढ़ के पानी गति कुछ धीमी हुई, लेकिन लोगों को राहत नहीं मिली है।
बाढ़ग्रस्त गांवों में अधिकांश परिवार मजदूर वर्ग के हैं। जो रोज कमाते और खाते हैं। उनकी मजदूरी डेढ़ माह से बंद है। बाढ़ से घिरे गांवों में नियमित लंच पैकेट भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। समाजसेवी रिजवान अहमद और राजस्वकर्मी भी पहुंच वाले गांवों में ही नियमित लंच पैकेट पहुंचा पा रहे हैं। ऐसे में सैकड़ों गरीब परिवारों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन ने अब तक दो दर्जन बाढ़ से घिरे लगभग 27 हजार बाढ़ पीड़ितों में ग्राम मस्जिद नगला, कटैला नगला, आजाद नगर, इस्लाम नगर, पैलानी, बांसखेड़ा आदि गांवों के 670 परिवारों को ही राशन किट वितरित की है। हजारों परिवारों को अब तक राशन किट भी नहीं मिल पाई है।
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दर्जनों परिवार रिश्तेदारियों में कर गए पलायन
ग्राम पंचायत भरतपुर के प्रधान प्रतिनिधि संतोष सिंह ने बताया कि बाढ़ से घिरे भरतपुर, पकड़िया नगला, धोबियन नगला, पंखिया नगला के दर्जनों परिवार सरकारी मदद नहीं मिलने से रिश्तेदारियों में पलायन कर गए हैं। गांवों में रह गए गरीब परिवार समाजसेवियों और राजस्वकर्मियों से लंच पैकेट लेने के लिए दोपहर में तो रोड पर पहुंच जाते हैं। शाम को वह भी नहीं मिल पाता है।
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अंधेरे में गांव, नहीं मिल पा रहा केरोसिन
लगभग डेढ़ माह से बाढ़ क्षेत्र के गांवों की बिजली कटी हुई चल रही है। जिन ग्रामीणों के पास सोलर प्लेट हैं, वे सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज करके घरों और आश्रय स्थलों पर रोशनी कर लेते हैं। जिनके पास यह सुविधा नहीं है, वे रात अंधेरे में ही काटने का मजबूर हैं। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को केरोसिन या मोमबत्ती उपलब्ध नहीं कराई है। जिससे रात में उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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पशुओं के चारे की भी समस्या
बाढ़ से घिरे गांवों में रहने वाले परिवार आश्रय स्थल या, हाईवे किनारे और ईंट भट्ठों पर अपने पशुओं समेत शरण लिए हुए हैं। प्रशासन ने इनके लिए तो भोजन व्यवस्था कर दी है, लेकिन पशुओं के लिए चारे की कोई व्यवस्था नहीं की है। जिससे बाढ़ पीड़ित पशुओं को जिंदा रखने के लिए चारे की व्यवस्था में ही पूरे दिन लगे रहते हैं।
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गंगा का जलस्तर मामूली घटा, गर्रा का बढ़ा
बाढ़ नियंत्रण कक्ष शारदा नहर खंड से जारी रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को गंगा का जलस्तर 143.58 मीटरगेज था, जो कि मंगलवार को घटकर 143.56 मीटरगेज हो गया। गर्रा नदी का जलस्तर सोमवार को 144.80 मीटरगेज था, जो मंगलवार को बढ़कर 144.90 मीटरगेज हो गया। रामगंगा और खन्नौत नदी का जलस्तर घट गया है। गंगा में मंगलवार को नरौरा बैराज से 91,851 क्यूसेक पानी, रामगंगा में विभिन्न बैराजों से 18,604 क्यूसेक और गर्रा नदी में 1,475 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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बाढ़ क्षेत्र में लगातार खाने के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं, मरीजों के लिए मेडिकल आश्रय स्थल पर कैंप चल रहा है, रोगियों को लगातार दवाओं का वितरण किया जा रहा है। बाढ़ क्षेत्र में अधिकारी और राजस्व कर्मी भ्रमण करके लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
- डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, बाढ़ प्रभारी अधिकारी
मिर्जापुर के पैलानी में बुखार से पीड़ित पिता पुुुुुुुुुुुुुत्र। संवाद
मिर्जापुर के पैलानी में बुखार से पीड़ित पिता पुुुुुुुुुुुुुत्र। संवाद